सांसद हुकुम सिंह ने पलायन करने वाले जिन लोगों की सूची जारी की, वह सत्यापन के बाद सवालों में घिर गई। प्रशासन के साथ ही मीडिया कर्मियों ने भी कैराना की गलियों में घूमकर सूची की सत्यता का पता लगाया, तो चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए। 346 पलायन करने वालों की सूची में से केवल नौ परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने दहशत के चलते पलायन किया।
सूची में 190 नंबर पर विनोद जाटव पुत्र बिहारी जाटव का नाम दिया गया। विनोद का घर ज्वालागढ़ी में है। टीम मौके पर पहुंची, तो वह अपने घर मिले। उनका कहना था कि में जन्म से यहीं रह रहा हूं और ना मैंने पलायन किया। सूची में मेरा नाम किसने लिखवाया, मुझे पता नहीं है।
वहीं, सूची में 195 नंबर शामिल मुरारीलाल भी ज्वालागढ़ी में ही रहते हैं और विकलांग है। उनका भी कहना था कि मैंने पलायन नहीं किया, मेरा नाम किसी ने बेवजह लिखवा दिया। इसके अलावा सूची में 224 नंबर पर किरणपाल का नाम दिया गया, जिसके पिता का नाम पीरू जाटव लिखा।
मौके पर पता चला कि किरणपाल तो पीरू जाटव के दामाद हैं। वह गाजियाबाद में नौकरी करने चले गए हैं। उनके ससुर पीरू का कहना था कि उनके दामाद ने पलायन नहीं किया, किसी ने गलत नाम लिखवा दिया होगा। वह अपना मकान निजी कारणों से बेचना चाहते हैं, पलायन से उसका कोई वास्ता नहीं है।
प्रशासन के अनुसार सत्यापन में पाया गया कि 131 नंबर पर सोनू जाटव का नाम है। सोनू का परिवार यहीं रहता है। 177 नंबर पर प्रेमचंद शर्मा का नाम है।
प्रेमचंद की मृत्यु कई साल पूर्व हो चुकी है, मगर उनके पांच बेटे कैराना में ही रहते हैं।
255 नंबर पर ब्रजपाल कश्यप भी कैराना में रहकर चाय बेचने का कार्य करते हैं। वहीं, 289 पर दयाचंद का नाम है, जो कैराना में ही रहते हैं, मगर उनका परिवार पानीपत में जाकर रहने लगा। 294 नंबर पर मास्टर प्रवीण का नाम है, जो कैराना में ही रहते हैं।
गलत नामों पर सांसद ने भी जताई नाराजगी ः पलायन करने वालों की सूची के बारे में जब सांसद हुकुम सिंह से पूछा गया कि सूची में ऐसे नाम भी हैं, जो कैराना में ही रह रहे हैं। इस पर सांसद ने सूची बनाकर देने वाले से फोन पर बातचीत कर नाराजगी भी जताई और कहा कि सूची बनाने में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए थी।