कई गांवों के किसानों ने मिल गेट पर शुरू किया दिन रात का धरना
मिल से चीनी बाहर जाने से रोकने के संबंध में पंचायत कर बनाई जाएगी रणनीति
बड़ौत। बकाया गन्ना भुगतान सहित अन्य कई मांगों के विरोध में रविवार को क्षेत्र के कई गांव के किसानों का गुस्सा फूटा। किसानों ने मलकपुर चीनी मिल पर पहुंचकर हंगामा कर प्रदर्शन किया। इस दौरान उनकी मिल व पुलिस प्रशासन के साथ नोकझोंक हुई। ठोस आश्वासन न मिलने पर किसान अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ गए। सूचना पर गन्ना विकास समिति मलकपुर के डिप्टी व सचिव किसानों के बीच पहुंचे और उन्हें समझने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांगों को पूरा करने पर अड़े रहे और मांग पूरी न होने तक दिन-रात धरना जारी रखने का निर्णय लिया।
रविवार को सिनौली, बरवाला, बावली, मलकपुर, लोयन, छछरपुर, महावतपुर, रूस्तमपुर आदि गांवों के किसान मलकपुर चीनी मिल पर पहुंचे और हंगामा-प्रदर्शन कर मिल के बाहर तंबू लगाकर धरने पर बैठ गए। वक्ताओं ने कहा चीनी मिल प्रबंधन ने किसानों के साथ धोखा करते हुए बेची 558 करोड़ रुपये की चीनी में से 123 करोड़ रुपये का गड़बड़झाला किया है, जबकि इस धनराशि से किसानों का सत्र 2019.20 तक का करीब सारा बकाया भुगतान चुकता किया जा सकता था। इस संबंध में गन्ना समिति सचिव की तरफ से मिल के यूनिट हैड विपिन चौधरी सहित दो के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा रखा है, अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे किसानों में आक्रोश पनप रहा है।
किसानों ने कहा यदि मांग पूरी होने तक दिन-रात धरना जारी रहेगा। इसके अलावा मिल से बाहर ले जाने पर रोक लगाने के संबंध में सोमवार को पंचायत कर निर्णय लिया जाएगा। धरने में विपिन पूनिया, गौरव बावली, कुलदीप, सुरेश पाल बावली, नीरज, डॉ. प्रताप लोयन, राज कुमार, जयसिंह, चांद पूनिया, कर्मवीर, उदयवीर, मनोज, गौरव, विनोद कुमार, वरुण तोमर, कृष्णपाल सिंह, राममेहर, रोहित तोमर, अमरपाल, कमलदीप, गुड्डू, देशराज सिंह, बिजेंद्र सिंह, नरेंद्र पहलवान आदि रहे।
ये बोले मिल अधिकारी----
बड़ौत। मलकपुर चीनी मिल के वॉइस प्रेजीडेंट विपिन चौधरी ने बताया कि मिल द्वारा 21 फरवरी तक किसानों को भुगतान भेजा जा चुका है। अन्य बकाया गन्ना भुगतान भी जल्द से जल्द किसानों के खातों मेें भेजने का प्रयास किया जा रहा है।
ये है किसानों की मांगे---
1. बकाया गन्ना भुगतान जल्द करें मिल।
2. मिल परिसर में किसानों के लिए बैठने की हो व्यवस्था।
3. किसानों व उनके पशुओं के लिए पीने लायक पानी की हो व्यवस्था।
4. किसानों के लिए शौचालय की व्यवस्था।
5. मिल में आने-जाने वाले जर्जर रास्ते की हो मरम्मत।