बड़ौत। कोरोना महामारी के बीच में योगाभ्यास से खुद को स्वस्थ बनाए रखना है। इस मौसम में बीमारियों से बचना बेहद जरूरी है। योगाभ्यास में आसनों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। यह कहना है दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर व योगाचार्य डॉ. महेश कुमार मुछाल का। योगाचार्य ने बताया कि चक्रासन करने पर शारीरिक स्थिति एक चक्र के समान दिखाई देती है। इसलिए इसे चक्रासन कहा जाता हैं।
चक्रासन करने का तरीका
- योगाचार्य ने बताया कि चक्रासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। फिर घुटनों को मोड़ें और एड़ी को जितना हो सके, अपने नितंब के पास लाएं। फि र अपने हाथों को उठाकर कानों के किनारे ले आएं। हथेलियों को जमीन पर रखें। अपने पैरों के साथ-साथ हथेलियों का उपयोग करके शरीर को ऊपर की ओर उठाएं। अपने कंधे और पैरों को समानांतर खोलें अर्थात आपके पैरों की एडियों के बीच की दूरी कंधों के समान होनी चाहिए। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे कमर को ऊपर की तरफ उठाएं। घुटनों और कोहनियों को अधिक से अधिक सीधा रखने की कोशिश करें।
चक्रासन के विशेष लाभ
- योगाचार्य का कहना है कि अस्थमा के रोगियों को इसका अभ्यास नियमित रूप से करना चाहिए। चक्रासन के नियमित अभ्यास से फेफड़ों को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। तनाव और अवसाद दूर होता है। आंखों की रोशनी तेज होती है। पाचन और प्रजनन अंगों को स्वस्थ रखता है।
चक्रासन करते समय सावधानियां
- उन्होंने बताया कि जिनको पीठ की चोट या रीढ़ की हड्डी में समस्याएं है, वह चक्रासन न करें। हृदय की बीमारियों व उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति भी चक्रासन न करें। गर्भवती महिलाओं को भी इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।