बागपत। प्रदेश का पायलट प्रोजेक्ट बागपत में फेल हो गया है। इसलिए ही एक लाख 21 हजार महिलाएं और बच्चे पुष्टाहार नहीं मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं। क्योंकि आंगनबाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार सप्लाई करने के लिए लगाया गया प्लांट बंद पड़ा है, तो दूसरे प्लांट से पूरे पुष्टाहार की सप्लाई नहीं हो रही है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्थानीय स्तर पर प्लांट लगाकर पुष्टाहार वितरण के पायलट प्रोजेक्ट को बागपत में शुरू किया था। इसके लिए दाहा और पिलाना में 90-90 लाख रुपये से प्लांट लगाए गए थे, जिनमें पुष्टाहार तैयार करके आंगनबाड़ी केंद्रों पर सप्लाई किया जाना था।
पिलाना ब्लॉक से पिलाना, बागपत ग्रामीण, बागपत शहरी, खेकड़ा और दाहा के प्लांट से बड़ौत, बिनौली, छपरौली में पुष्टाहार की सप्लाई होनी थी। पिलाना से हर महीने एक लाख 36 हजार किग्रा और दाहा से तीन लाख 12 हजार किग्रा पुष्टाहार की सप्लाई होनी थी। लेकिन प्लांट की शुरूआत होने पर केवल 50 प्रतिशत ही पुष्टाहार का उत्पादन हो सका। अब पिछले दो महीने से पिलाना का प्लांट बंद पड़ा है। इसका कारण मशीनों में खराबी, पुष्टाहार उत्पादन के लिए सामग्री नहीं होना बताया जा रहा है। इसके साथ ही अधिकारी इस पर ध्यान भी नहीं दे रहे हैं और इस कारण समस्या बढ़ती जा रही है।
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छह महीने देरी से मिल रहा था पुष्टाहार
पुष्टाहार पहले ही छह महीने देरी से मिल रहा था। अब नवंबर और दिसंबर में किसी भी तरह का पुष्टाहार नहीं मिला है। जबकि यहां आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह से तीन साल तक के 62521 बच्चे पंजीकृत हैं। तीन से छह साल तक के 29756 बच्चे और 28859 गर्भवती व धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। इन सभी को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कोट...
मशीन खराब हो गई थी, जिसको ठीक कराया जा रहा था। इस कारण प्लांट बंद था। इसके साथ ही बजट की समस्या के कारण पुष्टाहार तैयार करने को सामग्री नहीं थी, जिसको जल्द ही मंगवाकर प्लांट को शुरू कराया जाएगा। - ब्रजभूषण सिंह, उपायुक्त राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन