कभी घर-घर फुदकने वाली गौरैया भले ही विलुप्त होने की कगार पर हो, लेकिन चौगामा क्षेत्र के गांव निरपुड़ा में गौरैया चिड़िया आज भी खूब फुदकती दिखाई देती है। वृद्ध सुखबीर के अलावा तीन ग्रामीण ऐसे हैं, जिनकी दिनचर्या में इन चिड़ियों की देखभाल भी शामिल है।
प्रदेश सरकार ने गौरैया को बचाने की पहल जरूर की, लेकिन अभी तक भी अपेक्षित कामयाबी नहीं मिली। गौरैया को बचाने के लिए निरपुड़ा के ग्रामीणों ने सकारात्मक प्रयास किया है। चिड़िया को बचाने के अभियान में जुटे सुखबीर सिंह (75) बताते हैं कि एक दिन उसे घर के दरवाजे पर खड़े पेड़ पर कुछ चिड़िया बैठी दिखाई दी थी।
उसने चिड़ियों के लिए दाना रखा और पानी का इंतजाम किया। धीरे-धीरे यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। रोज सुबह गौरैया सुखबीर के आंगन में चहचहाने लगती है। गांव के चरण सिंह फौजी और हरेंद्र सिंह ने भी गौरैया को बचाने के लिए इनके लिए दाना-पानी का इंतजाम किया। गांव में अब सैकड़ों की संख्या में गौरैया रोज सुबह दिखाई देती हैं।
ग्रामीण कहते हैं कि इन चिड़ियों को रहने के लिए ठिकाना और दाने-पानी का इंतजाम मिल जाए तो फिर से घर-घर में चिड़िया दिखाई देनी शुरू हो जाएगी। सुखबीर के अनुसार अब वह इन चिड़ियों के साथ खूब घुल-मिल गए हैं।
कामयाब नहीं हुए सरकारी घोंसले
गौरैया को बचाने के लिए विश्व गौरैया दिवस पर वन विभाग की तरफ से जनपद में करीब 11 सौ घोंसले बांटे गए थे। इनमें इक्का-दुक्का जगह ही गौरैया नहीं अपना ठिकाना बनाया। अधिकतर घोंसले लापता हो चुके हैं।
डीएफओ मनीष मित्तल ने कहा कई जगह से गौरैया के आने की सूचनाएं मिली हैं। लोगों से चिड़िया के लिए दाने-पानी का इंतजाम करने के लिए कहा गया है।
जेल में भी बनेगा चिड़िया का ठिकाना
प्रदेश सरकार ने गौरैया बचाने के लिए राज्य की जेलों में इनके घोंसले रखवाने की योजना तैयार की है। पिछले दिनों यहां आए कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने ऐलान किया था कि जेलों में गौरैया के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी।