बागपत। शहर के ठाकुरद्वारा मोहल्ले में रहने वाले परिवारों में किसी का बेटा कैंसर से जूझ रहा है, तो कोई दुकान के सहारे परिवार का गुजारा कर रहा है। पहले ही समस्याओं से जूझ रहे परिवारों की पीड़ा जमीन धंसने से मकानों में दरार आने पर बढ़ गई है। वह अपनों का इलाज कराकर जिंदगी बचाए या जमापूंजी को मकान में लगाए। हालात ऐसे हो गए हैं कि अपना मकान होते हुए किराए पर रहना पड़ रहा और कर्ज लेकर मकान बनाना पड़ेगा।
ठाकुरद्वारा मोहल्ले में रहने वाले राधेश्याम शर्मा केंद्रीय भंडारण निगम में लिपिक थे जो अगस्त 2022 में सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका बेटा अंकुश शर्मा कैंसर की बीमारी से जूझ रहा है, जिसका जमापूंजी से उपचार कराया जा रहा है। अब उनके मकान का फर्श धंस गया है तो दीवारों में सभी जगह दरार आई हुई है।
अगर मकान को ठीक नहीं कराया तो किसी भी समय हादसा हो सकता है। मिस्त्री ने करीब दस लाख रुपये का खर्च बताया है, जिसमें दीवारों में बीम लगाने से लेकर फर्श व प्लास्टर दोबारा होगा। ऐसे में सबसे बड़ी पीड़ा है कि मकान ठीक कराने में बेटे का उपचार बाधित होगा।
12 हजार रुपये महीना किराए पर रहेंगे, कर्ज लेकर मकान बनेगा
ठाकुरद्वारा मोहल्ले की दूसरी गली में रहने वाले राजीव गुप्ता किराना के सामान की दुकान करते है। दुकान के सहारे परिवार का गुजारा हो रहा है। जमीन धंसने से मकान की दीवारों में दरार आ गई है और वह झुकने लगी है। फर्श भी कई जगह से धंस गया है। सबसे ज्यादा नुकसान राजीव गुप्ता के मकान में हुआ है। इसलिए ही हादसा होने के डर से कुछ दूर रहने के लिए 12 हजार रुपये महीने में मकान लिया है, जहां सामान शिफ्ट किया है। राजीव कहते हैं कि अपना मकान होते हुए किराए पर रहना पड़ेगा और मकान दोबारा बनाने में 30 लाख रुपये से ज्यादा खर्च आएगा। उनके पास कुछ जमापूंजी है तो कुछ कर्ज लेना पड़ेगा।
हर किसी की पीड़ा, आखिर कैसे कराएंगे मकान ठीक
प्रमोद कश्यप, नरेश समेत अन्य की पीड़ा भी यही है कि मकान ठीक कराने के लिए पैसे कहां से आएंगे। क्योंकि सभी के मकान की दीवारों में दरार आई हुई है और दीवारों की नींव तक धंसने से वह झुकने लगी है। उनको ठीक कराने में लाखों रुपये का खर्च आएगा। जहां मकान गिरने की दहशत बनी हुई है तो उसे ठीक कराने के लिए पैसे की व्यवस्था करने की चिंता है।
बागपत के ठाकुरद्घारा मोहल्ले में शुक्रवार को मकान में दरार दिखाती महिला