ईंट निर्माता समिति के तत्वाधान में मंडलीय भट्ठा मालिकों का सम्मेलन हुआ। इसमें निर्णय लिया गया कि ईंट भट्ठों से पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र की बाध्यता सरकार समाप्त नहीं करती तो ईंट भट्ठों का संचालन नहीं किया जाएगा।
मंडलीय सम्मेलन में अखिल भारतीय ईंट निर्माता महासंघ के महामंत्री रविंद्र कुमार तेवतिया और पूर्व महामंत्री सुरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि भारत में 1.45 लाख ईंट भट्ठेे ग्रामीण अंचल में है। लाखों मजदूर अपनी रोजी रोटी कमाते है।
भारत सरकार फ्लाई एश की ईंटों और इसके उत्पादों ब्लॉक आदि को बिल्डिंग में प्रयोग करने के लिए दबाव बना रही है। सरकार नेशनल कंपनी और उद्योग को फायदा पहुंचाने के लिए ग्रामीण सीजनल उद्योग को बंद कर ग्रामीण मजदूरों को भूखा मारना चाहती है।
निर्णय लिया कि जब तक स्वच्छता पर्यावरण बाध्यता को समाप्त नहीं किया जाता भट्ठा मालिक ईंट भट्ठों का संचालन नहीं करेंगे। न ही उप्र सरकार को किसी प्रकार की रॉयल्टी, वाणिज्य कर, पंचायत कर नहीं देंगे और न ही किसी प्रकार का सर्वे होने देंगे।
सम्मेलन में पश्चिमी उप्र के ईंट भट्ठा मालिकों ने भाग लिया। हरियाणा के प्रदीप, उत्तराखंड के गोपी श्रीवास्तव, फैजाबाद के अतुल सिंह, चंदौली के रतन श्रीवास्तव, इटावा के कुंदेभ यादव, एटा के चौधरी अख्तर सिंह, मेरठ के केपी सिंह, मुजफ्फरनगर के राजेंद्र सिंह तोमर, शामली के भूपेंद्र मलिक, बिजनौर से नरेंद्र सिंह, अमरोहा के सरदार त्रिलोचन सिंह, अमरोहा के संजीव गुप्ता, मुरादाबाद के जन्मपाल सिंह, अलीगढ़ के कमल गोयल, हाथरस के राजीव कुमार, मथुरा के ओमबीर भाटी आदि ने भाग लिया।
सम्मेलन को सफल बनाने में सन्नी ककौर, संजीव बालियान, धर्मेंद्र, प्रदीप ककौर, रणबीर सिंह, अनिल मलिक, केपी मलिक, दीपक यादव, रामदास, अजय जैन, रामनिवास, कृष्णपाल, जसवंत मलिक, प्रमोद गुप्ता, मुकेश शर्मा, विनोद गोयल, धर्मपाल चेयरमैन, आनंदपाल, वेदपाल सिंह, विक्रम सिंह, नरेंद्र सिंह, मनोज नंगला रहे। विजय गोयल ने अध्यक्षता और विक्रम राणा ने संचालन किया।