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आंसुओं में डूबा काठा, गांव की गलियों में सन्नाटा

Sat, 16 Sep 2017 01:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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बागपत के काठा गांव में हुए नाव हादसे में परिजन की मौत पर बिलखती महिला। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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काठा में नाव हादसे के बाद गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है। दुकानें बंद रहीं। किसान खेतों पर नहीं गए। घरों में महिलाओं की मातमी चीख-पुकार से हर किसी की आंख में आंसू भर आए। सबकी जुबान पर हादसे का जिक्र रहा। लोगों ने कहा कि भयावह हादसे के गम से उबरने में गांव का न जाने कितने साल लगेंगे।  
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काठा के 19 लोगों की जिंदगी यमुना में समा गई। यह घटना पर गम और गुस्सा ही था जिस वजह से लोग सड़कों पर उतरे और विरोध किया। शुक्रवार को गांव में मातमी सन्नाटा था। गलियां सुनसान रही। वाहनों की आवाजाही ही सन्नाटे को तोड़ रही थी। दुकानों के शटर गिरे थे और अधिकतर शिक्षण बंद रहीं। कुछ शिक्षण संस्थाएं खुली भी, लेकिन इनमें बच्चों की संख्या कम रही। यहां मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन  रखा गया। 

दलित बस्ती के घरों में महिलाओं की चीख-पुकार मची रही है। दरअसल, गांव में इसी बस्ती और आसपास के क्षेत्र में ही सबसे अधिक लोग हादसे में हताहत हुए हैं। पीड़ित परिवारों को ढांढस मिलते ही, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
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घरों में पहुंचे लोगों ने हिम्मत बंधाई। किसी का भाई चला गया तो किसी की बहन। किसी के सिर से पिता का साया उठा। घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं रहीं तो बवाल की वजह पुलिस-प्रशासन को बताया गया। काठा में दिनभर सन्नाटे का माहौल ही रहा।

उधर, कोतवाली में इस हादसे को लेकर पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुकदमे में बताया गया कि नाव में 30 सवारी थी। इनमें से 11 लोगों को गोताखोरों द्वारा सकुशल निकाल लिया गया था, जबकि 19 लोगों की मौत हो गई है।  इनके शव बरामद हो गए हैं। इसके अलावा नाव में खाद के बोरे लदे हुए थे। 
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