बागपत। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन के मुआवजे के विवाद निपटे तो इसके निर्माण ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी। कॉरिडोर निर्माण के लिए मिट्टी डालने का कार्य अधिकतर जगह पूरा हो चुका है। क्योंकि यह कॉरिडोर काफी ऊपर से गुजरेगा और इसपर सड़क निर्माण जल्द शुरू करने की तैयारी है।
बागपत में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से मुजफ्फरनगर की सीमा से सटे टीकरी गांव तक 31 गांवों के 5428 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हुआ है।
इसके अलावा 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन का अधिग्रहण भी हुआ है। किसानों को जमीन का 882 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है। जहां शुरूआत में किसान मुआवजा नहीं ले रहे थे और इसको लेकर विवाद बढ़ रहा था।
वहीं अब करीब 825 करोड़ रुपये का मुआवजा किसान ले चुके है। मुआवजे का यह विवाद निपटा तो वहां कॉरिडोर निर्माण के लिए मिट्टी डालने का कार्य अधिकतर जगह पूरा हो गया। अब ऐसी कोई भी जगह नहीं बची है, जहां मिट्टी डालने का कार्य नहीं हुआ है।
बागपत के लिए बड़ा फायदेमंद होगा कॉरिडोर
इस कॉरिडोर की शुरूआत दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से होकर देहरादून में यह खत्म होगा। एक्सप्रेस-वे तक इसे एलिवेटेड बनाया जा रहा है और आगे मिट्टी डालकर ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। इसका निर्माण दिसंबर 2024 तक पूरा होना है और जिस तेजी से कार्य चल रहा है, उससे यही उम्मीद लगाई जा रही है कि समय पर कार्य पूरा हो सकता है।
अब पारिवारिक विवाद बाकी
जमीन अधिग्रहण के बाद कुछ विवाद ऐसे भी आए थे, जिनमें भाइयों के बीच जमीन की हिस्सेदारी का विवाद चल रहा था। अब जितना भी मुआवजा बचा हुआ है, वह अधिकतर इस तरह से पारिवारिक विवाद का बचा हुआ है। अधिकारी उनको भी निपटाने में लगे है, जिससे पूरा मुआवजा वितरण हो सके।
जमीन का मुआवजा मिल चुका है और जमीन पर कब्जा लेकर कार्य भी शुरू करा दिया गया है। - वीरपाल, किसान
मुआवजा पूरा मिल चुका है और उसपर काम भी शुरू करा दिया गया है। जितनी जमीन बची है, वह कॉरिडोर से दूसरी तरफ चली गई है। जिसपर खेती करने को लेकर समस्या है। - रामबीर शर्मा, किसान
कोट...
- इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे को लेकर काफी विवाद शुरू हो गए थे। जिनको धीरे-धीरे खत्म करके अधिकतर मुआवजा वितरण कर दिया गया है। जिससे जमीन पर कब्जा लेकर निर्माण कार्य में तेजी आई है। प्रतिपाल चौहान, अपर जिलाधिकारी