बागपत। सत्यपाल मलिक राजनीति का एक चर्चित चेहरा रहे हैं। वह एक बार विधायक, दो बार राज्यसभा सदस्य, एक बार सांसद व केंद्रीय मंत्री और चार राज्यों के राज्यपाल रहे। उनका ओहदा लगातार बढ़ता रहा लेकिन संपत्ति कम होती रही। यह सुनकर कम ही विश्वास होता है, मगर यही सच्चाई है। हिसावदा गांव के सत्यपाल मलिक ने राजनीति की शुरुआत 1968-69 में छात्र नेता के रूप में की थी। उनकी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से निकटता रही। वह वर्ष 1974 में बागपत सीट से जीतकर विधायक चुने गए। इस चुनाव को लड़ने से पहले गांव में उनकी पुस्तैनी करीब 30 बीघा खेती की जमीन थी। इसके अलावा परिवार की 700 वर्ग गज में 300 वर्ष पुरानी संयुक्त हवेली आज भी मौजूद है।
उस हवेली में सत्यपाल मलिक के हिस्से के चार कमरे हैं। सत्यपाल मलिक ने राजनीति को हमेशा समाजसेवा का माध्यम समझा। यही कारण रहा कि उन्होंने विधायक बनने के बाद भी समाजसेवा के लिए 15 बीघा जमीन बेच दी। इसके बाद वह दो बार राज्यसभा सदस्य और सांसद बनकर केंद्रीय राज्यमंत्री भी रहे, मगर 1996 में उन्होंने गांव की बाकी 15 बीघा जमीन बेच दी।
उनको वर्ष 2017 में बिहार का राज्यपाल बनाया गया और वह जम्मू कश्मीर, गोवा व मेघालय के राज्यपाल भी रहे। वह अक्तूबर 2022 में सेवानिवृत्त हो गए। तब उनके पास दिल्ली में रहने के लिए एक फ्लैट और गांव में केवल चार खंडहर कमरे रह गए। उन खंडहर कमरों में भी टूटी चारपाई व एक टूटा पलंग आज भी पड़ा है। (संवाद)