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त्याग करने से मनुष्य के भीतर आती है सरलता

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बिनौली। दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन श्री दिगंबर जैन पुराना और बड़ा मंदिर में जैन अनुयायियों ने भक्तिभाव के साथ उत्तम त्याग धर्म की आराधना की। उज्जैन से आये पंडित अशोक शास्त्री, अचल शास्त्री के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने संगीतमय वातावरण में प्रात:काल अभिषेक, शांतिधारा, जन्म कल्याणक की नित्य नियम पूजा की। पंडित अशोक शास्त्री ने कहा कि परद्रव्यों का मोह छोड़कर संसार देह और भोगों से विरक्त रहना ही उत्तम त्याग धर्म है। त्याग करने से मनुष्य के भीतर सरलता, अहिंसा और मोह का जाल कम होता है। इससे प्राणी का जीवन स्वत: ही सुखमय बन जाता है। इसके उपरांत वाणी ग्रुप ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य, नाटिका प्रश्नोत्तरी, प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। पूजा अर्चना में मदनलाल जैन, नीरज जैन प्रमोद, पप्पल जैन, विनोद जैन, उत्सव जैन, ऋषभ जैन, संभव जैन, अंकुर जैन, ठेकेदार सचिन जैन, रजत जैन आदि उपस्थित रहे। उधर, श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में ऋषभ जैन के निर्देशन में सतेंद्र जैन, धनेंद्र जैन, प्रवीण जैन, अतुल जैन, सचिन जैन, बिजेंद्र जैन, पारस जैन, रजत जैन, विक्की जैन, मोहित जैन, संभव जैन, संयम जैन, रिंकू जैन, शुभम जैन, मोहित जैन, आदि जैन समाज के लोगों ने उत्तम त्याग धर्म की पूजा अर्चना की।
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