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25 साल में सिर्फ एक कदम बढ़ा रोडवेज बस अड्डा

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बागपत के चमरावल रोड स्थित दुड़भा गांव में बस अड्डे के लिए चिन्हित की गई जमीन - फोटो : BAGHPAT
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- 25 साल बीत गए बागपत को जिला बने, आज तक नहीं बन सका रोडवेज बस अड्डा
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- 24 साल में केवल दुड़भा गांव में जमीन मिली, एक साल में नींव भी नहीं रखी जा सकी
- 2021 में जमीन परिवहन निगम को स्थानांतरित होने के बावजूद आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई
- बस अड्डे को लेकर कई बार मांग उठ चुकी, हर बार उम्मीद जगने के साथ ही टूट रही
बागपत को जिला बने भले ही 25 साल बीत गए हो, लेकिन यहां आज तक रोडवेज बस अड्डा नहीं बन सका है। इन 25 वर्षों में पहले 24 साल तो केवल जमीन ही ढूंढने में निकल गए। जमीन मिली तो पिछले एक साल में नींव रखने कवायद भी शुरू नहीं हो सकी है। यह हालात तब है कि जब विधान सभा से लेकर लोक सभा चुनाव तक में इसे मुद्दा बनाया गया, लेकिन हर बार उम्मीद टूट गई। राजधानी दिल्ली से सटे बागपत में रोडवेज बस अड्डे को लेकर अब भी लगातार मांग उठ रही हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। इसे अफसरों की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा ही कहेंगे कि जिलेवासियों के लिए रोडवेज बस अड्डे का सपना 25 साल में भी पूरा नहीं हो सका है। वर्ष 1997 में जिले का तमगा मिलने के बाद धीरे-धीरे अधिकांश सरकारी कार्यालयों के भवन तो बना दिए गए, लेकिन लोगों की मूलभूत जरूरत में शामिल परिवहन व्यवस्था आज तक बेपटरी चल रही हैं। इसका कारण यह है कि रोडवेज बस अड्डा की उम्मीदों पर ब्रेक लगा हुआ है।
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जिला मुख्यालय पर बस अड्डा बनाने के लिए 24 साल केवल जमीन चिह्नित करने में निकल गए। पहले सिसाना के पास जमीन देखी गई। इसके बाद नौरोजपुर रोड पर बस अड्डा बनाने की बात कही गई। इसके अलावा भी कई जगह जमीन देखी जाती रही, लेकिन किसी को फाइनल नहीं किया जा सका। सरकार ने पिछले साल चमरावल रोड पर दुड़भा गांव के पास बस अड्डे के लिए चिह्नित की गई जमीन को मंजूरी दी। दुड़भा में खसरा नंबर 280 की 0.4150 हेक्टेयर जमीन राजकीय महाविद्यालय की जमीन थी, जिसे बस अड्डा बनाने के लिए उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के नाम स्थानांतरित किया गया।
एक साल से दबी फाइल, उम्मीद टूटने लगी
पिछले साल जमीन चिह्नित होने के बाद उम्मीद जगी थी कि अब जिला मुख्यालय पर बस अड्डा बनने का काम जल्द शुरू हो जाएगा। मगर, समय के साथ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी हैं। बस अड्डे की फाइल एक साल से दबी पड़ी है, जिससे लोगों की उम्मीद टूटने लगी हैं।
बस अड्डा नहीं तो केवल मेरठ, दिल्ली, सहारनपुर तक बस मिलेगी
रोडवेज बस अड्डा नहीं होने के कारण बसें भी ज्यादा नहीं है। यहां से केवल मेरठ, दिल्ली, शामली व सहारनपुर तक के लिए ही बस मिलती हैं। इनके अलावा किसी जगह जाने के लिए निजी वाहन और डग्गामार का सहारा लेना पड़ता है। बस अड्डा होने पर परिवहन व्यवस्था बेहतर हो सकती हैं।
बागपत में अभी तक बस अड्डा नहीं बन सका है। इसके अभाव में बसों के लिए सड़कों पर खडे़ होकर इंतजार करना पड़ता है। बस अड्डा बनवाने के लिए कई बार मांग उठा चुके हैं, लेकिन हर बार उम्मीद जगने के साथ टूट जाती हैं। - पंडित राधेश्याम शर्मा, अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति
जिला मुख्यालय पर बस अड्डे की सबसे ज्यादा जरूरत है, ताकि यहां से अन्य राज्यों के लिए भी बस सीधे मिल सके। इसे लेकर कई बार मांग उठाई गई हैं। अब इसमें तेजी लाई जाएगी जाएगी। - प्रताप गुर्जर, जिलाध्यक्ष भाकियू
बागपत से केवल मेरठ, दिल्ली, शामली व सहारनपुर तक की बस मिलती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बस अड्डा नहीं होना है। ऐसे में यहां बस अड्डा जल्द बनाया जाना चाहिए, जिससे परिवहन व्यवस्था बेहतर हो सके। - जयपाल शर्मा, पूर्व प्रधानाचार्य
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जिला मुख्यालय पर बस अड्डा बनवाने के लिए जमीन तय हो चुकी हैं। इसके लिए सवा चार करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। इससे संबंधित सभी कार्रवाई आरएम मेरठ कार्यालय से चल रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही बजट को मंजूरी मिल जाएगी। - विपिन अग्रवाल, एआरएम रोडवेज
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