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बेटी बचाने और पढ़ाने का संकल्प

Thu, 22 Sep 2016 01:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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नारी सम्मान के कार्यक्रम में भाग लेती महिलाएं व लोग। - फोटो : amar ujala
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बागपत। उत्तर प्रदेश सरकार और अमर उजाला की नारी सम्मान संगोष्ठी में बेटी बचाने और पढ़ाने का संकल्प लिया गया। इसमें डीएम ह्दय शंकर तिवारी ने कहा  घर-घर में बेटी का सम्मान होगा तो समाज में बदलाव आएगा। महिलाएं समाज का अटूट हिस्सा हैं। उनका सम्मान समाज के प्रत्येक व्यक्ति का उत्तरदायित्व हैं।
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बुधवार को सम्राट पृथ्वीराज चौहान डिग्री कॉलेज में आहूत गोष्ठी में डीएम ने कहा बेटियों ने देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। सरकार ने ऐसी बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए कई सार्थक कदम उठाए हैं। नारी सम्मान घर-घर में होना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति सहयोग करें। 
इस मौके पर सीडीओ जेपी रस्तौगी ने कहा सरकार ने खेल के मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। समाज के प्रत्येक तबके की महिलाओं को अपनी योजनाओं से लाभान्वित किया। समाज में वक्त के साथ बदलाव आ रहा है। बेटी घर का अहम हिस्सा होती हैं, उन्हें महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल किया जाना जरूरी है। 
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  एएसपी अजीजुल हक ने कहा शिक्षा के दम पर ही महिला सशक्तिकरण  संभव है। बेटी शिक्षा के क्षेत्र में आगे आएं। महिला का मुकाबला खुद महिला से ही है। घरेलू हिंसा जैसे मामलों में महिला की भूमिका मिलती है। शिक्षित बेटी ही समाज को नई दिशा की ओर ले जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी शशि वार्ष्णेय ने सरकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला। बाल संरक्षण अधिकारी दीपांजलि ने महिला कानून के विषय में बताया। सीएचसी बागपत के अधीक्षक डॉ. प्रतोद कुमार ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाओं पर प्रकाश डाला। इसमें छात्रा शाइना और रेणु ने भी विचार रखें। इसमें प्राचार्य डॉ. अनिल चौहान, सीओ राजबीर सिंह, जिला सूचना अधिकारी कृष्णपाल सिंह, प्रदीप ढाका, सुभाष नैन, दुलारी रावत मौजूद रही। संचालन डॉ. कुलदीप त्यागी ने किया। 

राजकीय हाईस्कूल फतेहपुर पूठी की प्रधानाध्यापक डॉ. रेखा ने कहा बेटी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अभिभावक की होती है। मां-बाप अगर बच्चों में समानता का भाव रखेंगे तो समाज में भी  ऐसे ही भाव पैदा होंगे। समाज को इस अभियान में एकजुटता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इसकी शुरूआत सब अपने घर से करें।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की समन्वयक रेहाना सुल्ताना ने कहा जागरूकता से ही सब संभव है। समानता का भाव घर से शुरू होना चाहिए। घर-घर में जब एकरूपता आएगी, तो समाज में खुद ही बदलाव हो जाएगा। प्रत्येक घर में बेटी का सम्मान का दर्जा मिले और उसकी शिक्षा का खास प्रबंध किया जाना चाहिए।

सम्राट पृथ्वीराज चौहान डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल चौहान ने कहा जो हालत हैं, उनके लिए भी समाज जिम्मेदार है। यदि कोई बदलाव लाया जाना है, तो उसमें भी समाज को एकजुटता के साथ आगे आना होगा। बेटियों और महिलाओं को सम्मान मिले तो समाज और देश की दशा और दिशा ही सुधर जाएगी।

आंगनबाड़ी संगठन की पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष सरिता चौधरी का कहना है कि महिलाओं ने प्रत्येक क्षेत्र में बाजी मारी है। वर्तमान में समाज में बदलाव आया है, लेकिन अभी इस बदलाव को आगे बढ़ाना होगा। समाज एकजुट हो। खुद महिलाएं ही इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी शशि वार्ष्णेय ने कहा समानता का भाव मां-बाप से शुरू होना चाहिए। इसके बाद समाज उसे खुद स्वीकार करेगा। सरकार की सैकड़ों योजनाएं हैं, लेकिन पहल घर और परिवार से ही शुरू होती है। बेटियों ने वर्तमान में प्रत्येक क्षेत्र में खुद को साबित कर दिखाया है।
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