बड़ौत। प्रदेश के संस्कृत विद्यालय में पढ़ रहे छात्रों को बड़ी राहत मिली है। क्योंकि माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद पाठ्यक्रम समिति ने बैठक कर गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी के कोर्स को 30 फीसदी कम करने का निर्णय लिया है। समिति के इस निर्णय को छात्रों ने सही बताया है। उनका कहना है कि कोर्स कम होने से उन्हें सभी विषय पढ़ने के लिए अधिक समय मिल जाएगा।
जनपद में पंचमुखी पाठशाला संस्कृत विद्यालय बड़ौत और दादू बलराम संस्कृत महाविद्यालय ग्वालीखेड़ा संचालित हैं। जिनमें सैकड़ों छात्र इस समय शिक्षण ग्रहण कर रहे हैं। उन्हें जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने समिति के निर्णय की सराहना की और कहा कि यह कदम छात्र हित में सही है।
ये बोले छात्र -
- कक्षा आठ की परीक्षाएं हिंदी माध्यम से उत्तीर्ण कर संस्कृत विद्यालय में प्रवेश लिया है। क्योंकि उनका ध्यान संस्कृत की ओर अधिक है। दूसरे विषयों का कोर्स कम होने पर संस्कृत को पढ़ने और सीखने में पर्याप्त समय मिल सकेगा। - रितेश वशिष्ठ
- संस्कृत के अलावा दूसरे विषयों में रूचि कम ही है, इसलिए संस्कृत विद्यालय में प्रवेश लिया। उन्होंने समिति द्वारा कोर्स कम होने की बात पर कहा कि यह अच्छा रहेगा। क्योंकि संस्कृत विषय को और अधिक पढ़ा जा सकेगा। - कार्तिक कौशिक
- वह संस्कृत में पंडित बनना चाहता है और दूसरे विषयों में उसकी अधिक रुचि नहीं है। कोर्स कम होने पर संस्कृत सीखने का और अधिक मौका मिलेगा। क्योंकि दूसरे विषयों की वजह से संस्कृत से ध्यान भटकता रहता था। आरव पंडित
ये बोले प्रधानाचार्य-
दूसरे विषय कम होने से संस्कृत विषय में बच्चे अधिक ध्यान देंगे। जिससे बच्चे संस्कृत को और अच्छी तरह से सीख पाएंगे और संस्कृत के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ेगी। यह छात्रहित के लिए बहुत अच्छा रहेगा और अन्य छात्र भी संस्कृत पढ़ने में अपनी रूचि दिखाएंगे। - साेनू शर्मा, प्रधानाचार्य