बागपत में भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैप्टन भोपाल सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे छपरौली के जसवीर की बागपत जेल में हालत बिगड़ गई। पहले जेल के अस्पताल और फिर जिला चिकित्सालय में उपचार कराया। वहां भी सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने कैदी को मेरठ रेफर कर दिया। मेरठ ले जाते वक्त रास्ते में ही कैदी की मौत हो गई। जेल प्रशासन का दावा है कि जसवीर की बुखार से मौत हुई है। जबकि परिजनों का कहना है कि जसवीर पूरी तरह से स्वस्थ था।
भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैप्टन भोपाल सिंह की वर्ष 2004 में छपरौली कस्बे में हत्या की गई थी। इस मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे छपरौली के जसवीर (49) को 15 मई को बागपत जेल बनने के बाद 93 अन्य बंदियों के साथ मेरठ जेल से बागपत शिफ्ट किया गया था। प्रदेश के कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया और राज्यसभा सदस्य प्रोफेसर राम गोपाल वर्मा ने जेल का उद्घाटन किया था।
बुधवार को जिला कारागार में जसवीर की हालत बिगड़ गई। जेल चिकित्सालय के डॉक्टरों ने चेकअप किया, लेकिन हालत खराब होने पर वह उसे लेकर जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे। यहां भी जसवीर की हालत में सुधार नहीं हुआ। यहां से उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया। मेरठ ले जाते वक्त रास्ते में उसकी मौत हो गई। सिपाही उसे मेडिकल लेकर पहुंचे, जहां उसे मृत घोषित किया।
जेलर बीएल मिश्रा ने बताया जसवीर को मंगलवार की रात में बुखार हुआ था। उसका कारागार अस्पताल में उपचार कराया। हालत में सुधार हो गया था। बुधवार को सुबह करीब साढ़े 11 बजे अचानक उसकी हालत खराब गई। इस कारण उसे अस्पताल ले जाया गया, वहां उसकी मौत हो गई। उधर, मृतक के भतीजे रोहित ने बताया सोमवार को उसकी चाची रीता (जसवीर की पत्नी) एक केस की पेशी के दौरान बागपत कचहरी परिसर में उसके चाचा जसवीर से मिली थी। उस समय चाचा पूरी तरह से स्वस्थ थे। उनकी मौत किस कारण से हुई है। इस बारे में वे अभी कुछ नहीं कह सकते हैं। जबकि जिला अस्पताल के चिकित्सक जसवीर को लंबी बीमार होना बता रहे हैं।
ये था कैप्टन भोपाल हत्याकांड
बागपत। छपरौली थाना पुलिस के मुताबिक छपरौली कस्बा निवासी एवं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भोपाल सिंह कैप्टन की 19 अक्तूबर 2004 को कस्बा में हत्या की। इस मामले में मृतक के परिजनों ने आरोपी जसवीर, सचिन रिटायर्ड प्रधानाध्यापक रणवीर सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपी जसवीर समेत कई लोगों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
मौत से परिवार में मचा कोहराम
बागपत। जसवीर के तीन बेटे रमन, अमन और अजय है। उनकी मौत की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का बुरा हाल है।
हवाई साबित हुए जेल मंत्री के दावे
बागपत। तीन दिन पहले कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया और सपा के राज्यसभा सदस्य प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने जेल का उद्घाटन करते वक्त लंबे चौड़े दावे किए थे। बंदियों को सुविधा, स्वच्छ पानी, बैरकों की सफाई व्यवस्था और खानपान शुद्ध देने की बात कही गई थी। जेल में होने वाली मौतों की जांच की बात भी कही थी। लेकिन सिर्फ तीन दिन बाद ही सपा सरकार के दावे हवाई साबित हुए। बीमार कैदी ने मेरठ ले जाते वक्त दम तोड़ दिया।
जसबीर की मौत पर अलग-अलग बयान
बागपत। जिला जेल में बंद कैदी की मौत बयानों में उलझकर रह गई है। कोई बुखार तो कोई दमा की लंबी बीमारी से मौत का दावा कर रहा है,। लेकिन मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन और चिकित्सकों के बयानों को पूरी तरह से नकार दिया है। उनका कहना है कि जसवीर पूरी तरह से स्वास्थ्य थे। छपरौली कस्बे का जसवीर पिछले करीब 12 वर्षों से जेल में बंद थे।
बुधवार को अचानक हालत बिगड़ जाने से उसकी मौत हो गई। जेलर बीएल मिश्रा का दावा है कि जसवीर को मंगलवार रात बुखार हुआ था। उस समय उसका उपचार कराया था। बुधवार को फिर उसकी हालत बिगड़ गई थी। इसी कारण उपचार के दौरान उसकी मौत हुई है। जसवीर के साथ जेल से जिला अस्पताल पहुंचे कारागार अस्पताल के फार्मेसिस्ट जीडी मेहता ने जानकारी दी कि जसवीर लंबे समय से बीमार चल रहा था।
बुधवार को हालत बिगड़ने से उनकी मौत हुई है। जिला अस्पताल के चिकित्सक भूपेंद्र सिंह ने कहा जसवीर को देखने से प्रतीत होता है कि उसके पहले से दमा हो सकता है या अचानक हार्ट अटैक हुआ है। जबकि जसवीर के भतीजे रोहित ने कहा उसके चाचा पूरी तरह से स्वास्थ्य थे।
मेरठ से भेजे गए 10 बीमार बंदी
बागपत। बीमारी के चलते जसबीर की मौत के बाद जेल प्रशासन अब अन्य बीमार बंदियों की मेडिकल फाइल खंगाल रहा है। मेरठ जेल से दस बुजुर्ग बंदी यहां भेजे हैं, जिनका इलाज चल रहा है। पारा 44 डिग्री के पार पहुंच चुका है, इससे बीमारियों के बढ़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। बागपत जेल के उद्घाटन के लिए यहां मेरठ से जेल से 93 बंदी शिफ्ट किए थे।
जसबीर की मौत के बाद बंदियों के हेल्थ कार्ड की पड़ताल शुरू हो गई है। असलियत में यहां भेजे बंदियों में 10 बुजुर्ग बंदी बीमार हैं। बुढ़ापे के कारण इन्हें कोई न कोई बीमारी रहती है। इनकी मेडिकल फाइल तैयार है। फिलहाल यहां बंदियों की देखरेख के लिए एक डॉक्टर और दो फार्मेसिस्ट नियुक्त किए हैं। जसबीर की मौत के बाद जेल प्रशासन चौकन्ना हो गया है। पारे का मिजाज 44 डिग्री के पार है, ऐसे में बंदियों की हालत बिगड़ सकती है।