कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल ने किसानों को कर्ज माफी के प्रमाण पत्र देने से पहले सियासत के तीर चलाए। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का नाम लिए बगैर बागपत के विकास पर सवाल उठाया। दिल्ली के नजदीक होने के बावजूद शिक्षा के पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया।
शुक्रवार को मौका था उत्तर प्रदेश फसल ऋण मोचन योजना के जिला स्तरीय समारोह का। बघेल ने कहा कि बागपत ने यूपी को सीएम और देश को पीएम तक दिए, लेकिन बदले में इस जिले को क्या मिला।
किसानों से कहा कि दिल्ली के आसपास नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव और गाजियाबाद से बागपत की तुलना करें और सोचें कि बागपत का विकास क्यों नहीं हुआ। नजदीक होने के बावजूद भी दिल्ली के उच्च शिक्षण संस्थानों का लाभ बागपत के लोग नहीं उठा पाए। सैकड़ों किमी दूर के पूर्वांचल और बिहार के लोगों ने फायदा उठाया।
बघेल ने बड़े चौधरी का नाम लिए बगैर विकास पर सवाल उठाया। रालोद अध्यक्ष अजित सिंह पर भी सियासी प्रहार किए। कहा कि लोकसेवा आयोग के ऐसे अफसर एसडीएम बना रहे थे जो खुद चपरासी बनने लायक नहीं है।
तंज भी कसे और नसीहत भी दी
बागपत। जिले के प्रभारी मंत्री ने क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था के बिगड़े सिस्टम, खेती और खराब व्यवस्था पर तंज कसे। साथ ही नसीहत दी कि ग्रामीण और किसान खुद को बदलें, यहां तक कह दिया कि बच्चों को पढ़ाने के लिए दिल्ली में रहना पड़े तो इससे भी गुरेज नहीं करें।
किसान से ज्यादा पटवारी अमीर
बागपत। एसपी सिंह बघेल ने कहा कि 20 बीघे के किसान से ज्यादा अमीर पटवारी होता है। 50 बीघा के किसान से ज्यादा अमीर उससे ऊपर का अफसर और एक सौ बीघा जमीन के किसान से अमीर उससे ऊपर का अफसर होता है, लेकिन बशर्ते वह बेईमान हो। किसानों से आह्वान किया कि वह आधुनिक शिक्षा पर ध्यान दें।