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Baghpat News: विदेशों तक खिलाड़ियों ने लहराया परचम, खेल सुविधाएं फिर भी नहीं

Thu, 29 Aug 2024 03:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
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बागपत। जिले के खिलाड़ियों ने ओलंपिक तक देश का प्रतिनिधित्व किया तो विश्व चैंपियनशिप में कई पदक दिलाए। इनके अलावा भी कई अन्य प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने विदेशों तक परचम लहराया। खिलाड़ियों की इतनी उपलब्धियों के बाद भी यहां खेल सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। स्टेडियमों और तरणताल की हालत खराब है। अधिकारी भी इसपर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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सरकार ने यहां की खेल उपलब्धियों को देखते हुए कलक्ट्रेट के पास बहुउद्देश्यीय क्रीड़ा हॉल का निर्माण कराया था। मगर खेल विभाग की उदासीनता और रखरखाव के अभाव में क्रीड़ा हॉल की हालत खराब है। उसका फर्श और छत जगह-जगह से टूटे हुए है। जिससे वहां खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। इस तरह ही बड़ौत में बनवाए गए बाबा शाहमल स्टेडियम की हालत खराब है। वहां भी भवन जर्जर हो रहा है और झाड़ खड़े हैं। इसलिए वहां भी खिलाड़ी प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं।
खेकड़ा स्टेडियम की हालत भी बदतर
खेकड़ा में बनाया गया खेल स्टेडियम बदहाल हो गया है। जगह-जगह गंदगी के अंबार लगे हैं। सफाई के अभाव में बड़ी-बड़ी घास उग आई है। सफाई न होने के कारण खिलाड़ी भी स्टेडियम में खेलने के लिए नहीं जाते हैं। इस स्टेडियम के लिए सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि यहां रास्ता तक नहीं है।
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ओलंपिक तक गए, छह अर्जुन और दो लक्ष्मण अवार्ड मिले
जिले में छह अर्जुन अवार्डी, दो लक्ष्मण अवार्डी और दो रानी लक्ष्मीबाई अवार्डी खिलाड़ी है। वर्ष 1987 में जिले के मलकपुर गांव के पहलवान सुभाष तोमर को पहला अर्जुन अवार्ड मिला। 1999 में जोहड़ी के शूटर विवेक सिंह, 2003 में मलकपुर के पहलवान शोकेंद्र तोमर, 2010 में मलकपुर के पहलवान राजीव तोमर, 2014 में दाहा के पहलवान सुनील राणा और 2018 में खेकड़ा के पैरा एथलीट अंकुर धामा ने अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। कुश्ती में अंशु तोमर और तीरंदाजी में रितिका को रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड ले चुकी है। मलकपुर के नितिन तोमर कबड्डी और खेड़की के दिव्यांग शूटर आकाश शूटिंग में लक्ष्मण अवार्ड जीत चुके हैं। यहां के सुभाष तोमर, राजीव तोमर, संदीप तोमर ने ओलंपिक तक का सफर तय किया तो अखिल श्योराण ने विश्व चैंपियनशिप में पदक जीते।
-सरकार को खेलों को बढ़ावा देने के लिए कोच और खलीफाओं से वार्ता करके योजनाएं बनानी चाहिए। एकेडमी का संचालन करने के लिए बजट की व्यवस्था करनी चाहिए। खेलों को बढ़ावा देना है तो धरातल पर सुविधा बढ़ानी होगी। - राजीव तोमर, ओलंपियन व अर्जुन अवार्डी पहलवान
-यहां खेलों के नाम पर कुछ सुविधा नहीं है। पहले सरकारों में कुछ खेल सुविधाएं बेहतर की गई थी, मगर देखरेख के अभाव में वह भी नहीं बची। अगर यही हाल रहा तो यहां से खिलाड़ी निकलने बंद हो जाएंगे। जबकि यहां से पहले काफी खिलाड़ी निकलते थे। यहां प्रतिभाएं बहुत हैं, मगर उनको केवल सहारे की जरूरत है। - शौकेंद्र तोमर, अर्जुन अवार्डी पहलवान
-खेलो को बढ़ावा देने के लिए सरकार को नए खिलाड़ियों पर ध्यान देना होगा। पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना होगा और सुविधाएं बेहतर करनी होगी। सरकार की ओर से नेशनल पदक विजेताओं को समय पर प्रोत्साहन राशि देनी होगी। - सुनील राणा, अर्जुन अवार्डी व कुश्ती कोच
-सरकार को खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए अच्छे मैदान व कोच की व्यवस्था करनी चाहिए। जिले में मैदान और कोच के अभाव में खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए दूसरे शहराें या फिर राज्यों में जाना पड़ता है। - नितिन तोमर, अंतर्राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी

वर्जन
स्टेडियमों की हालत सुधारने के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। जिसको जिलास्तर पर मंजूर करके शासन को भेजा जाएगा। उसको वहां से मंजूरी मिलते ही स्टेडियमों को ठीक कराया जाएगा। इसके अलावा खेल अधिकारी को स्टेडियमों की देखरेख सही से कराने के लिए कहा गया है। - पंकज वर्मा, एडीएम
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