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पीजोमीटर बताएगा कितना गिरा भूजल स्तर

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बागपत। भूजल के संरक्षण और प्रबंधन की कवायद तेजी से चल रही है। भूजल स्तर के अध्ययन के लिए भूगर्भ जल विभाग ने बागपत, मेरठ और हापुड़ में 34 पीजोमीटर के निर्माण का टेंडर निकाला है। बागपत में 11, मेरठ में 13 और हापुड़ में 10 पीजोमीटर लगाए जाएंगे। अटल भूजल योजना के तहत इनका निर्माण कराया जाएगा।
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अटल भूजल योजना की तर्ज पर राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश अटल भूजल योजना की शुरुआत की है। पहले यह योजना प्रदेश के 10 जिलों में लागू थी। बाद में शेष 65 जिलों में भी योजना लागू किया गया। योजना के तहत शुरुआत में बेसलाइन सर्वे करते हुए हर जिले के भूजल स्तर का अध्ययन किया जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक में पीजोमीटर लगाए जाएंगे। ये पीजोमीटर डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर से लैस होंगे, जिनसे टेलीमेट्री के माध्यम से रीयल टाइम ग्राउंड वाटर लेवल प्राप्त होगा। पीजोमीटर के नेटवर्क से पांच वर्षों के भूजल स्तर का आंकलन होगा। इससे प्राप्त डाटा को ब्लॉक/ग्राम पंचायत स्तर पर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। योजना काल में विभिन्न मांग और आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए विकास खंड के भूजल स्तर का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। लक्ष्य है कि विकास खंड के भूजल स्तर की गिरावट दर में सुधार हो। भूजल अध्ययन के लिए वृहद मॉनिटरिंग नेटवर्क का विकास भी किया जाएगा।
क्या है पीजोमीटर उपकरण
भूगर्भ जल विभाग के सहायक भू-भौतिकविद नौरतन कमल ने बताया कि पीजोमीटर के जरिये भूगर्भ जल के स्तर को मापा जाता है। इसके लिए 40 से 60 मीटर तक की गहराई की छह इंच मोटा बोरिंग कर पाइप डाला जाता है। रीडिंग लेने से पहले पीजोमीटर की कैप खोली जाती है। इसके इंचीटेप में एक शंक्वाकार भार बांध कर बोरिंग में छोड़ा जाता है। जल का स्तर मिल जाने की एक आवाज सुनाई देती है। इस तरह भूगर्भ का जल स्तर मापा जाता है। इससे यह पता लगाया जाता है कि भूगर्भ जल कितना बढ़ा है और कितना कम हुआ है।
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