जिले के विकास को अब पंख लगने जा रहे हैं। खासकर उन गांवों में जहां से ईस्टर्न पेरीफेरल होकर गुजरेगा। इन गांवों की किस्मत ही खुल जाएगी। यहां की जमीन पर न सिर्फ बिल्डरों की नजर लगी हुई है, बल्कि औद्योगिक विकास के लिए भी इस क्षेत्र को उर्वरा के रूप में देखा जा रहा है।
इन गांवों में आवासीय मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने के लिए सरकारी एजेंसियां भी तैयारी में है। सब कुछ ठीक रहा तो मार्च 2018 तक बनकर तैयार होने वाला यह पैरीफेरल बागपत पर लगा पिछड़ेपन का दाग धोने में कामयाब हो जाएगा।
पेरीफेरल एक्सप्रेस वे निर्माण की बाधाएं दूर हो चुकी हैं। 18 सितंबर को शिलान्यास के साथ ही इस पर तेजी से काम शुरू होने जा रहा है। बागपत में एक्सप्रेस-वे लगभग 20 किमी की लंबाई में हैं। यही एक्सप्रेस-वे बागपत के 11 गांवों को जोड़ता हुआ जाएगा।
सिक्स लेन एक्सप्रेस-वे बनते ही इन 11 गांवों की किस्मत के साथ ही बागपत की किस्मत भी बदल जाएगी। इन गांवों की भूमि पर तो अभी से बिल्डरों की नजर लगी हुई है। बताया जा रहा है कि न सिर्फ आवासीय इमारतों के लिए बल्कि औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए गांवों की भूमि का निरीक्षण करने के लिए लोग पहुंचने लगे हैं।
सबकुछ ठीक रहा तो इन गांवों तक शहरी की सुविधाएं पहुंचते देर नहीं लगेगी, बल्कि इन गांवों में टाउनशिप तैयार करने के लिए बिल्डर्स आगे आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि एजूकेशन सिटी भी तैयार की जाएगी। आवासीय कॉलोनियां भी डवलप की जा रही हैं।
बागपत-बड़ौत-खेकड़ा विकास प्राधिकरण भी अब एक्सप्रेस-वे के किनारे वाले गांवों में आवासीय कालोनी तैयार करने के लिए जमीन की तलाश कर रहा है। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने की तैयारी कर रहा है। खेकड़ा को जोड़ते हुए जाने वाले एक्सप्रेस-वे से सबसे पहले खेकड़ा के लोग बूम आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।