बागपत। मेरठ में तिहरे हत्याकांड में अदालत ने सोमवार को दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तो ढिकाैली और सिरसलगढ़ के लोगों ने कहा कि अब दर्द थोड़ा कम हुआ है। क्योंकि जिन तीन युवकों की हत्या की गई थी, उनमें मूलरूप से बागपत के ढिकाैली गांव के सुनील ढ़ाका और सिरसलगढ़ गांव के सुधीर उज्ज्वल भी थे। उनकी मौत का दर्द हर किसी को था।
सुनील ढ़ाका का परिवार घटना के कई साल पहले मेरठ में जाकर रहने लगा था तो सुधीर उज्ज्वल वहां पढ़ाई के लिए गया था। बागपत के होने के कारण ही उनमें गहरी दोस्ती हो गई थी। इन दोनों के साथ ही पुनीत गिरी का शव 23 मई 2008 को बालैनी थाने से कुछ दूर हिंडन नदी के किनारे कार में मिले थे। उनकी काफी बेरहमी से हत्या की गई थी। बागपत के बेटो की हत्या से यहां के लोगों में काफी गम के साथ गुस्सा था। अब इस मामले में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद ढिकाैली के ओमवीर ढाका ने कहा कि जिस तरह से तीन छात्रों की जघन्य हत्या की गई थी, वह काफी वीभत्स था। अदालत ने हत्यारोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाकर पीड़ित परिवारों को न्याय दिया है। डाॅ. अजय ढ़ाका कहते हैं कि अदालत के फैसले से तीनों परिवार को न्याय मिला है। अदालत के फैसले से गांव के लोगों का अपने बेटे को खोने का दर्द कुछ कम हुआ है। एडवोकेट नरेश ढाका ने कहा कि हत्यारोपियों को फांसी की सजा की मांग कर रहे थे। मगर न्यायालय का फैसला सर्वमान्य है।
सुधीर के भाई बोले, फांसी की सजा पर कलेजे को ठंडक मिलती
सिरसलगढ़ गांव के मृतक सुधीर उज्ज्वल के छोटे भाई सोनू उज्ज्वल ने बताया कि जिस तरह से आरोपियों ने बर्बरता से हत्याकांड को अंजाम दिया था। उसे देखते हुए उनको फांसी की सजा सुनानी चाहिए थी। उनको फांसी की सजा मिलती तो कलेजे को ठंडक मिलती। उन्होंने बताया कि सुधीर की हत्या के बाद वर्ष 2013 में उसके पिता सुरेश उज्जवल की मौत हो गई। अब परिवार में उसके अलावा मां सुरेशवती रह गए। वहीं सिरसलगढ़ के ग्रामीणों ने कहा कि हत्याकांड के आरोपियों को आजीवन कारावास की जगह फांसी की सजा से मृतकों की आत्मा को शांति मिलती।