-वस्त्र की निर्मलता नीर और प्रभु भक्ति से होती है चरित्र की निर्मलता
फोटो - 4 की सीरिज
संवाद न्यूज एजेंसी
छपरौली। कस्बे में ज्ञानानंद महाराज, शिवानंद महाराज और प्रशमानन्द महाराज के निर्देशन में बृहस्पतिवार को पंचकल्याण महोत्सव का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर कस्बे के 1008 भगवान महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर से घट यात्रा निकाली गई। इसमें 108 इंद्राणी कलश लेकर चलीं। इसके उपरांत ध्वजारोहण कर अयोध्या नगरी का उद्घाटन किया गया।
घट यात्रा में समाज के श्रद्धालु बैंड बाजों की धुनों पर नाचते गाते हुए श्रीजी के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे । घट यात्रा का कस्बे में जगह-जगह पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया। अजय जैन ने ध्वजारोहण किया। पंचकल्याणक महोत्सव के पहले दिन शिवानंद महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि वस्त्र की निर्मलता नीर से होती है और चरित्र की निर्मलता प्रभु भक्ति से होती है। मन की मलिनता को दूर करने के लिए प्रभु भक्ति करनी होगी। प्रभु भक्ति और चरित्र पूर्ण आचरण कर्म के कलंक को धो देता है। मानव को अपने जीवन में सदैव ही संघर्ष और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। प्रभु की भक्ति से ही मन की मलिनता को दूर किया जा सकता है। बाहर की कोई भी यात्रा हो उसकी तिथि मानव के द्वारा होती है, लेकिन जीवन की यात्रा की कोई तिथि मानव के हाथ में नहीं होती है। मुनष्य को हर पल मृत्यु के तैयार रहना चाहिए, क्योंकि जीवन का कोई भरोसा नहीं। जो परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार नहीं होता है वह दुखों का पात्र बनता है। इससे पूर्व जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा कराई गई। रात्रि में सौधर्म इंद्र दरबार व माता मरूदेवी की सेवा, सोलह स्वप्न दर्शन का सुंदर दृश्य दिखाया गया। चक्रेश जैन के निर्देशन में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन कराया गया। कस्बे के श्री शांति सागर कन्या इंटर कॉलेज में अयोध्या नगरी आकर्षण का केंद्र बनी रही। आचार्य वसुनंदी की ओर से प्रसाद और सौरभ सागर सेवा समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई की व्यवस्था कराई गई। पंचकल्याण समिति के अध्यक्ष प्रदुमन जैन और मीडिया प्रभारी अमित जैन ने बताया कि कस्बे में हो रहे महापंचकल्याणक महोत्सव में देश के अलग-अलग प्रांतों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
इस मौके पर राकेश जैन, यश जैन, राहुल जैन, कालूराम जैन, अभिषेक जैन, सहित काफी संख्या में समाज के लोग, महिलाएं और बच्चे मौजूद रहे।