सांकरौद गांव के खाप पंचायत के बहुचर्चित मामले में सोमवार को पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। कोर्ट को अवगत कराया कि गांव में कोई खाप पंचायत नहीं हुई है।
दलित परिवार की युवती ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की थी कि उसके भाई का गांव की जाट बिरादरी की युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों अप्रैल माह में घर से भाग गए थे।
खेकड़ा पुलिस ने उन्हें बरामद कर लिया था। पुलिस ने युवती को उसके परिजनों को सौंप दिया था जबकि उसके भाई को नशीला पदार्थ रखने के मामले में जेल भेज दिया था। युवक की बहन ने आरोप लगाया गया था कि गांव में जाट बिरादरी की खाप पंचायत ने फरमान सुनाया था कि आरोपी युवक की बहनों के साथ दुष्कर्म किया जाएगा और उन्हें गांव में निर्वस्त्र करके घुमाया जाएगा।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए 14 सितंबर को एसपी बागपत को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। एएसपी विद्या सागर मिश्र का कहना है कि युवती द्वारा सुप्रीम कोर्ट में की गई शिकायत के आधार पर हर स्तर पर गांव में खाप पंचायत होने की जानकारी कराई गई, गांव में खाप पंचायत और इस प्रकार के फरमान की कोई पुष्टि नहीं हुई।
साथ ही युवती की बरामदगी में केस के विवेचक अमन सिंह ने नियमानुसार कार्रवाई नहीं की थी। लापरवाह मानते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। एएसपी ने बताया कि अधिवक्ता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट को इस बारे में अवगत करा दिया गया है। जो आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा।
खाप से खौफजदा परिवार आज सुप्रीम कोर्ट में होगा पेश ः नई दिल्ली। ऊंची जाति की लड़की को भगाकर लाने के कारण खाप पंचायत द्वारा जारी तुगलकी फरमान से खौफजदा प्रेमी और उसका परिवार मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश होगा। उत्तर प्रदेश के बागपत में रहने वाला परिवार फिलहाल दिल्ली में रहने को मजबूर है।
न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार तक पीड़ित परिजनों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और परिवार को अदालत में पेश होने के लिए कहा है। प्रेमी लड़के के परिजनों पर बलात्कार का मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया, जिस कारण परिजनों को अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा है। पीठ लड़के की बहन द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है।