बड़ौत। इससे भोलेनाथ की भक्ति की शक्ति ही कहेंगे कि भारी-भरकम कांवड़ लेकर पैरों में घाव और छाले होने के बावजूद सैकड़ों किमी चलकर भी कांवड़ियों को न तो दर्द हुआ और न ही थकावट। हालांकि यात्रा के दौरान कांवड़ियों को पेट दर्द, दस्त, खाज-खुजली, गैस व बुखार ने जरूर परेशान किया। यहीं कारण रहा कि इन मर्ज से संबंधित दवाइयों की अधिक खपत हुई। जबकि स्वास्थ्य शिविर में 50 तरह की दवाइयां उपलब्ध होने के बावजूद सबसे कम खपत दर्द/ थकावट की हुई है।
14 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू होने के बाद हरिद्वार से गंगाजल व कांवड़ लेकर जनपद से दिल्ली, राजस्थान, सोनीपत, हरियाणा सहित अन्य राज्यों के कांवड़ियों के गुजरने का सिलसिला शुरू हो गया था। जिला प्रशासन के निर्देशों पर कांवड़ियों के लिए यात्रा के दौरान दर्द, थकने, बुखार, उल्टी, दस्त, बुखार, गैस, घाव सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के लिए कांवड़ शिविर लगाए गए। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जनपद में 32 स्वास्थ्य कांवड़ शिविर लगाए गए। जिनमें 68 चिकित्सकों, 110 पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई थी। साथ ही शिविर में 50 तरह की दवाइयां भी उपलब्ध थी, ताकि परेशानी होने पर कांवड़ियों इन दवाइयों का इस्तेमाल कर सके।
ये बोले चिकित्सक
बड़ौत। नगर स्वास्थ्य अधिकारी और पूर्व सीएचसी अधीक्षक बड़ौत डॉ. अजेंद्र मलिक ने बताया कि कांवड़ शिविर में 3500 से अधिक कांवड़िये आए। शिविर में दर्द और थकावट की टेबलेट डाईक्लोफेनाक, ट्रामाडोल, आइबुपारा के अलावा जख्म / पैर के छालों की दवाई क्रीम डाइक्लोफिनेक परोवोडीन, बीटाडीन सोफ्रामायसिन उपलब्ध थी। इसके अलावा घाव को साफ और उस पर लगाने के लिए लोशन में बीटाडीन, जेंशियन, वॉयलेट, बुखार पैरासिटामोल, उल्टी की डोमपैरिडोम, पेट दर्द डाईसाईक्लोमन, गैस की ऐंटासीड, एंटी फंगस, कफ सीरप, एंटी एलर्जी, गले मेें संक्रमण के अलावा अन्य बीमारियों की दवाइयां उपलब्ध थीं। उन्होंने बताया कि शिविर में सबसे ज्यादा पेट दर्द, दस्त, खाज-खुजली, बुखार व गैस की दवाइयों की खपत हुई। नाममात्र ही कांवड़ियों ने दर्द व थकावट की दवाइयां इस्तेमाल की, जबकि लगातार चलने के बाद बहुत से कांविड़यों के पैरों में तो छाले भी पड़ गए थे, लेकिन मरहम पट्टी कराकर बिना दवाई लेकर बोल बम-बम का जयकारा लगाते हुए आगे की ओर बढ़ जाते।
- सीएचसी क्षेत्र में पांच जगह लगाए गए कांवड़ शिविर में 1800 से अधिक मरीज आए। सबसे ज्यादा दवाई पेट दर्द, दस्त, गैस, उल्टी और बुखार की खपत हुई। दर्द और थकावट की दवाइयां काफी कम खपत हुई है। - डॉ. विजय कुमार, सीएचसी अधीक्षक
- आठ जगहों पर लगाए गए कांवड़ शिविर में 8593 कांवड़िये आए। ज्यादा कांवड़िये या तो पेट दर्द, गैस, उल्टी से परेशान थे, या फिर बुखार, गले में संक्रमण सहित अन्य बीमारियों से। पैरों में घाव व छाले पड़े जाने पर ज्यादातर कांवड़िये मरहम पट्टी कराकर बोल बम-बम का जयकारों लगाते हुए पुरा महादेव के लिए रवाना हो जाते थे। - डॉ. अतुल बंसल, बिनौली सीएचसी अधीक्षक
बड़ौत में कावड़ियों के लिए लगाए गए चिकित्सा कैंप में शिव भक्तों को पट्टी बांधते नगर स्वास्थ्य अध?- फोटो : BARAUT