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उत्तम सत्य धर्म की पूजा कर श्रीफल अर्पित किए

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नेहरू रोड स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पूजा अर्चना करते जैन श्रद्धालु - फोटो : BARAUT
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बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांतिनाथ विधान और दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन रविवार को श्रद्धालुओं ने विधि विधान पूर्वक उत्तम सत्य धर्म की पूजा कर श्रीफल अर्पित किए।
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पंडित महेश चंद शास्त्री कहा कि ऋण का थोड़ा, घाव का छोटा, आग को तनिक और कषाय को अल्पमान कर बैठ जाना एक बहुत बड़ी भूल है। जो मोह मुक्त होकर सत्य को अंगीकार करते हैं उनका आत्मा से मिलन होता है, क्योंकि सत्य आत्मा का सौंदर्य है। असत्य तो कागज की नौका के समान है जो बड़ी मोहक एवं आकर्षक दिखाई पड़ती है। जो कभी भी जीवन को पार नहीं करा सकती। जिसने एक बार सत्य को पा, लिया वास्तव में उसके लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। पूजा में बादामी जैन, लता जैन, नमन जैन, मुकेश जैन, विशांत जैन, मुकेश जैन, सचिन जैन मौजूद रहे।
उधर बिनौली के श्री दिगंबर जैन पुराना मंदिर में भी दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन पंडित अश्वनी नानावटी के निर्देशन में जैन समाज के लोगों ने श्रद्धाभाव के साथ उत्तम सत्य धर्म की पूजा की। रात में मंदिर में भजन संध्या, आरती व बच्चों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मौके पर सुभाष चंद जैन, राकेश जैन, मदन जैन, प्रमोद जैन, धनपाल जैन, नीरज जैन, उत्सव जैन मौजूद रहे।
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जीवन में बेहतर आचरण होना आवश्यक
अमीनगर सराय/छपरौली। दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन श्रीजी का अभिषेक कर अर्घ्य अर्पित किए। शिवम शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में बेहतर आचरण होना अति आवश्यक है। समाज और परिवार में मान पाने के लिए उच्च आचरण को अंगीकार करना होगा। अच्छे आचरण के बिना मनुष्य पशु के समान होता है। उत्तम चरित्र ही मनुष्य को महान बनाता है। उधर छपरौली के श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर इंद्र ध्वज महामंडल विधान में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा की गई। इसके उपरांत श्रीजी की आरती, सभा एवं संस्कृति कार्यक्रम आयोजित किए। कार्यक्रम में सुनील जैन, संयम जैन, अंतवीर जैन, संदीप जैन, सुमित जैन, अन्तवीर जैन मौजूद रहे।
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