बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांतिनाथ विधान के दसवें दिन श्रद्धालुओं ने विधि विधान पूर्वक पूजा-अर्चना कर अर्घ्य अर्पित किए।
विधान में पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री जबलपुर ने कहा कि तीर्थंकर जैसी महान प्रकृति का बंद 16 कारण भावनाओं से जीवन में उत्पन्न होता है। जो जीव सच्चे देव शास्त्र गुरु की सच्चे मन से आराधना करते हैं, वह जीव तीर्थंकर प्रकृति को प्राप्त होते हैं। क्योंकि तीर्थंकर प्रकृति को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले सम्यक दर्शन को प्राप्त करना, जो अच्छे और बुरे की पहचान कराता है उसे सम्यक दर्शन कहते हैं। यही स्वर्ग और मोक्ष सुख को प्राप्त कराता है।