लचीले नियमों के कारण अंधाधुंध हो रहा था हरे पेड़ों का कटान
सख्त हुआ वन विभाग, एक पेड़ काटने के बदले लगाने होंगे 10 पौधे
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण के नियमों में सख्ती कर दी है। पहले जहां छह प्रजाति के पेड़ प्रतिबंधित श्रेणी में थे, वहीं अब नए नियम के अनुुसार 29 प्रजातियों के पेड़ काटने पर पाबंदी लगा दी गई है। ये प्रजातियां देशी हैं। देशी प्रजातियों के कारण पर्यावरण में जैव विविधता भी संरक्षित होगी। इसके साथ ही अब एक हरा पेड़ काटने के बदले दस पौधे लगाने के साथ ही उसे वृक्ष का आकार लेने तक संरक्षित करना होगा।
वन विभाग ने पहले छह प्रजातियों के पेड़ काटने पर प्रतिबंध लगाया था। प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों को काटने से पहले वन विभाग से अनुमति लेना आवश्यक किया गया है। विभागीय अनुमति के बाद ही लकड़ी के परिवहन की छूट मिलती है। लचीले नियमों के कारण अंधाधुंध हरे पेड़ों की कटान होने लगा। इसके विपरीत उस अनुपात में नए वृक्ष नहीं तैयार हो रहे हैं। घटते वन क्षेत्र के कारण जलवायु परिवर्तन होने के साथ ही पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने लगा। वातावरण में ऑक्सीजन की समस्या खड़ी होने लगी।
वन क्षेत्राधिकारी राजपाल सिंह ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वन विभाग ने प्रतिबंधित श्रेणी वाले प्रजातियों की संख्या छह से बढ़ाकर 29 कर दी है। पेड़ काटने की अनुमति के लिए आवेदक को 10 पौधे रोपने के साथ ही पौधों के संरक्षण का शपथपत्र देना होगा। आज्ञा शुल्क और जमानत राशि भी जमा करनी होगी। पौधे के वृक्ष बनने और वन विभाग के सत्यापन के बाद ही जमानत राशि संबंधित को वापस हो सकेगी। पहले एक पेड़ काटने के बदले दो पौधे व संरक्षण का नियम था।
ये हैं प्रतिबंधित श्रेणी के पेड़
जंगल वृक्ष संरक्षण अधिनियम में हुए संशोधन के बाद शीशम, सागौन, आम, नीम, महुआ, पीपल, बरगद, गूलर, पाकड़, पलाश, बेल, चिरौंजी, रीठा, कुसुम, असना, जामुन, कंधा, अर्जुन, बीजासाल, भिलावा, तून, सलई, हल्दू, बाकली, धौ, खैर, कैथा, इमली, खिरनी आदि के पेड़ काटना प्रतिबंधित किया गया है।
आज्ञा शुल्क व जमानत राशि भी हुई दोगुनी
वन दरोगा रविकांत चौधरी ने बताया कि जंगल वृक्ष संरक्षण अधिनियम में हुए संशोधन के बाद 29 प्रजातियों के पेड़ों पर यह शर्त लागू किया गया है। इसके साथ ही आज्ञा शुल्क के रूप में 100 रुपये के स्थान पर अब 200 रुपये प्रति पेड़ जमा करने होंगे। जमानत राशि भी एक हजार रुपये प्रति पेड़ से बढ़कर दो हजार रुपये कर दी गई। यह राशि एनएससी (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट) किसान बंधपत्र आदि माध्यम से जमा करनी होगी।