बागपत-बड़ौत-खेकड़ा विकास प्राधिकरण की कामचोरी अब अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मुसीबत बन गई है। प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही के चलते न तो नक्शे पास हो पा रहे हैं और न ही विभाग की आय हो पा रही है। इस वजह से जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वेतन भी रोक दिया है।
बागपत-बड़ौत-खेकड़ा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही ने प्राधिकरण की लुटिया ही डुबो दी है। एक सौ से अधिक नक्शे पास होने की लाइन में पेंडिंग पड़े हुए हैं। अवैध कॉलोनियां कुकुरमुत्तों की तरह बनती जा रहीं हैं, लेकिन प्राधिकरण न तो उन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहा है और न ही उनको नियमित ही करा पा रहा है। यहां तक कि ध्वस्तीकरण की तैयार पड़ी फाइलों पर भी अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। सख्ती की गई तो कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। सात साल पूर्व अस्तित्व में आने के बावजूद एक योजना तक तैयार नहीं कर सके। सभी काम कागजों तक ही सीमित रह गए। नतीजतन प्राधिकरण अपने वेतन के बराबर भी आय नहीं कर पाया। जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय ने समीक्षा की तो भड़क उठे। उन्होंने प्राधिकरण के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का वेतन रोकने के आदेश कर दिए। इसके चलते पिछले माह का भी वेतन नहीं मिल सका और इस माह का भी वेतन नहीं मिल पाया।
काम नहीं किया तो वेतन कैसा
जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय का कहना है कि विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही के चलते आय काफी कम रह गई। पिछले वर्ष के बराबर भी आय नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की आय से एक रुपया भी आय अधिक कर दें तो वेतन जारी कर दिया जाएगा।
आय बढ़ाने का प्रयास
बागपत-बड़ौत-खेकड़ा विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता प्रदीप सिंघल का कहना है कि पिछले वर्ष से 10 प्रतिशत अधिक आय के निर्देश दिए गए हैं। आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।