बागपत में बकाया का भुगतान नहीं होने से किसानों की कमर टूट गई है। अकेले मलकपुर मिल पर 252 करोड़ रुपये बकाया है। सबसे ज्यादा समस्याएं भी इसी क्षेत्र के किसान झेल रहे हैं। शादी, बीमारी और शिक्षा के मद से भुगतान कराने के लिए सैकड़ों प्रार्थना पत्र जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में लंबित है। एक किसान की बेटी की शादी बुधवार को होनी थी, लेकिन भुगतान नहीं मिलने के कारण विवाह की तिथि ही बदलनी पड़ गई। एक लाख रुपये की मदद की मंजूरी मिल गई है, लेकिन अभी तक शादी की तैयारी में जुटे किसान तक रुपये नहीं पहुंचे। किसान को डर है कि कहीं दोबारा उसे शादी की तिथि नहीं बदलनी पड़ जाए।
केस : 1
बरवाला गांव के किसान शिव कुमार ने जिला गन्ना अधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए बताया कि उसका पोता बीमार है। खून में इंफेक्शन हो गया है। परिवार का खर्च खेती से ही चलता है, उनके परिवार में आमदनी का कोई दूसरा जरिया नहीं है। रुपये मिल जाने से उन्हें इलाज कराने में आसानी होगी।
केस : 2
बरवाला गांव के ही किसान पुष्पेंद्र ने डीसीओ को चिट्ठी भेजी है। बड़ौत के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की फीस जमा नहीं हो पा रही है। स्कूल की ओर से भेजा गया रिमाइंडर प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न करते हुए किसान ने बताया कि उसे फीस जमा करने के लिए भुगतान कराया जाना आवश्यक है।
केस : 2
बड़ौत क्षेत्र के एक गांव के किसान ने बिटिया की शादी के लिए भुगतान मांगा था। शादी की तिथि पहली जून तय की गई। तैयारियां शुरू हुई, लेकिन प्रशासन निर्धारित समय पर मदद नहीं कर सका। नाम न छापने की शर्त पर किसान ने बताया कि वर पक्ष से सहमति लेकर शादी की तिथि बदली गई है।
मलकपुर मिल पर 252 करोड़ बकाया
बागपत की तीनों चीनी मिलों पर एसएपी की दर से किसानों का 330 करोड़ 17 लाख रुपये बकाया है। अकेले मलकपुर चीनी मिल पर 252 करोड़ 61 लाख रुपये बकाया चले आ रहे हैं। इससे किसान बेहद परेशान हाल है।
क्या है भुगतान का नियम?
डीएम बागपत की ओर से किसानों को शादी, चिकित्सा और शिक्षा के नाम पर राहत देने के लिए व्यवस्था लागू की गई थी। शादी और चिकित्सा खर्च के लिए एक-एक लाख और शिक्षा के लिए 50 हजार रुपये के भुगतान का प्रावधान किया गया था। इसके लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी और डीआईओएस की एक जांच कमेटी बनाई गई है। जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में प्राप्त होने वाले प्रार्थना पत्र इन दफ्तरों में सत्यापित कराए जाते हैं, इनके सत्यापन के बाद ही किसानों को भुगतान का प्रावधान किया गया है।
अधिकारी कहिन
- विवाह, बीमारी और शिक्षा के लिए तुरंत मदद देने के लिए प्रशासनिक स्तर से व्यवस्था की गई है। रोजाना ऐसे प्रार्थना पत्र आ रहे हैं। जांच के बाद जरूरतमंद किसानों को मदद दी जा रही है।
- सुशील कुमार, जिला गन्ना अधिकारी, बागपत।
फर्जी प्रार्थनापत्रों की भी भरमार
आर्थिक मदद के लिए कई किसान फर्जी प्रार्थना पत्र भी लगा रहे हैं। एक किसान ने अपने फेफडे़ में ही पथरी बताकर रुपये मांग लिए। एक महिला को बीमार बताकर अस्पताल में भर्ती दिखाया गया, लेकिन वह अपने घर में ही लेटी मिली। इस तरह के भी अन्य कई मामले सामने आए हैं।