एनसीआर ही नहीं, बल्कि वेस्ट यूपी में स्वाइन फ्लू ने दहशत फैला दी है। लेकिन बागपत में इसकी जांच के लिए किट तक नहीं है। जिला अस्पताल की ओपीडी में बुखार के मरीजों की कतार लगी है। डॉक्टर मॉस्क पहनकर इलाज कर रहे हैं। सीएमएस कहते हैं कि किट के लिए शासन को पत्र लिख दिया है। बगैर जांच किट के सैंपल मेरठ भेजे जाते हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना बुखार के करीब साढ़े चार सौ मरीज पहुंच रहे हैं। पिछले माह कई मरीजों में डेंगू के लक्षण मिले थे। जांच में कुछ मरीजों में डेंगू की पुष्टि भी हो चुकी है। डेंगू के बाद अब स्वाइन फ्लू सबसे बड़ा खतरा बन गया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की स्वाइन फ्लू से निपटने की कमजोर तैयारी नजर आ रही है।
बागपत में स्वाइन फ्लू की जांच नहीं होती है। ब्लड सैंपल लेकर मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं। बागपत में जांच किट नहीं है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ राजेश कुमार का कहना है कि स्वाइन फ्लू लक्षण के कई मरीज अस्पताल में आ चुके है। जांच की सुविधा न होने के कारण उसको रेफर कर दिया गया है।
उधर, सीएमएस डॉ बीएलएस कुशवाहा का दावा है कि स्वाइन फ्लू से ग्रस्त कोई मरीज अभी अस्पताल नहीं पहुंचा है। सैंपल के लिए किट की डिमांड लखनऊ मुख्यालय में की गई है। जल्द ही किट उपलब्ध हो जाएगी।
स्वाइन फ्लू से निरपुड़ा गांव की महिला की एक माह पूर्व मौत हो चुकी है। तवेलागढ़ी निवासी ब्रहमसिंह भी चपेट में आ गया था। उसका गाजियाबाद अस्पताल में उपचार चला। स्वास्थ्य विभाग का कहना था कि निरपुड़ा की महिला मेरठ में रहती थी, वहीं से स्वाइन फ्लू की चपेट में आई। जिले में बीमारी का खतरा नहीं है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
चिकित्सकों के मुताबिक स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य जुखाम जैसे ही होते है। इसमें 100 डिग्री तक बुखार आता है। भूख कम लगती है। नाक से पानी आता है और सांस में तकलीफ होती है। कुछ मरीजों के गले में जलन उल्टी के अलावा डायरिया हो जाता है।
निगरानी के लिए टीम का गठन
बागपत। एसीएमओ डाक्टर नीरज त्यागी व जिला महामारी रोग विशेषज्ञ डाक्टर दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में एक रेपिड रेस्पांस टीम का गठन किया गया है।
ओपीडी में नहीं मिले डॉक्टर, नाराजगी
बागपत। जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर नहीं मिले। सरूरपुर कलां के सुभाष नैन ने बताया कि इसकी शिकायत सीएमओ से की गई है। मरीज इधर से उधर भटकते रहे।