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यहां शाम सात बजे के बाद बस नहीं मिलती

Tue, 01 Sep 2015 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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जिले का तमगा मिलने के बावजूद बागपत शहर के लोग आज भी गांव जैसी स्थिति में है। यहां शाम सात बजे के बाद कोई बस नहीं मिलती। लोग मांग करते-करते थक गए है, लेकिन जिला बनने के 18 साल बाद भी बस स्टैंड तक नहीं मिल पाया। अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि आज तक बस स्टैंड के लिए जमीन तक तय नहीं की जा सकी।
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जिला बनने के बाद बागपत के लोगों को लगा था कि अब बागपत विकास की पटरी पर दौड़ेगा। बागपत में यातायात के नए साधन आएंगे। रोडवेज की बसें चलेंगी। बस स्टैंड बनाया जाएगा। बागपत से ही हर जगह के लिए  पहुंचा जा सकेगा। मगर, जिला बनने के 18 साल में भी यह सपना, सिर्फ सपना ही बना हुआ है।

 रोडवेज का डिपो बनना तो दूर, बस खड़े होने के लिए जगह तक नहीं तलाश कर सके अधिकारी। दूर दराज के गांवों की तरह आज भी बागपत में  शाम सात बजते ही बसें चलनी बंद हो जाती हैं। यहां से मेरठ, दिल्ली, सहारनपुर,  शामली तो क्या बड़ौत के लिए भी बस नहीं मिलती। लोगों के पास निजी वाहन हो तो ही बागपत से बाहर जा सकते हैं।
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सिर्फ मेरठ और लोनी तक बसें
बागपत में मेरठ से आने वाली बसें सिर्फ मेरठ तक ही पहुंचा सकतीं हैं। बड़ौत से लोनी तक बसें चल रही हैं, जो बागपत से होकर गुजरती हैं। सवारियां अधिक हों तो बागपत में रुकने का कोई मतलब नहीं। सवारियों को बस आने का घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। बागपत से न तो सीधे मुजफ्फरनगर जा सकते, न शामली और न ही सहारनपुर, गाजियाबाद, हापुड़, बिजनौर। सिर्फ मेरठ तक जा सकते हैं, वहां से ही कहीं ओर के लिए बस ढूंढनी पड़ती है।

सड़क पर स्टैंड
मेरठ डिपो की जो बसें बागपत तक आतीं हैं, उन्हें मेरठ रोड पर सड़क के किनारे ही खड़ी करना पड़ रहा है। कभी मुन्नालाल एंक्लेव में खड़ी की जातीं हैं तो कभी किसी पेड़ के नीचे सवारियों को उतारा और चढ़ाया जाता है। देर हो गई तो सड़क पर ही बस खड़ी कर चालक-परिचालक सो जाते हैं।

प्रस्ताव तैयार कराया है : एसडीएम
उपजिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह का कहना है कि बागपत में रोडवेज बस स्टैंड के लिए एक स्थान देखा गया है। मगर, परिवहन निगम के अधिकारियों ने उस पर अभी संतुष्टि नहीं जताई है। फिलहाल उसका ही प्रस्ताव बनाया गया है।
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