बागपत। नए कानून लागू हो गए हैं, जिसमें नई धाराओं में खेकड़ा थाने में मारपीट की धाराओं में पहला मुकदमा दर्ज हुआ। उधर, शांतिभंग में चालान काटने में पुलिस के पसीने छूट गए। इसके अलावा पुलिस अफसरों ने थानों में गोष्ठी कर लोगों को नई धाराओं की जानकारी दी।
बागपत कोतवाली में सोमवार की सुबह नए कानून को लेकर गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें बागपत शहर और क्षेत्र के गणमाण्य लोगों ने भाग लिया। बैठक में एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने लोगों को नए कानून में बदली गई धाराओं की जानकारी दी। साथ ही मुकदमों की जांच से लेकर न्यायालय में सजा होने के प्रावधान की जानकारी दी गई। एसपी ने कहा कि पुरानी धाराओं की जगह अब नई धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
इसके अलावा सिंघावली अहीर, रमाला, छपरौली समेत सभी थानों में एएसपी एनपी सिंह, सीओ और थाना प्रभारियों ने जागरुकता अभियान चलाया। उन्होंने बताया हत्या की धारा 302 के बदले अब 103 (1), लूट में आईपीएसी 392 की जगह 309(4) और चोरी में आईपीएसी 380 की जगह अब नए कानून के तहत 305 का प्रयोग किया जाएगा।
- पहले मुकदमे में यह लगी धारा
नई धाराओं में खेकड़ा थाने में दर्ज हुए मुकदमे में वादी रकमपाल निवासी डगरपुर ने बताया कि वह सोमवार की सुबह अपनी बेटी और बेटे का तिगरी गांव के स्कूल में दाखिला कराकर लौट रहा था। गांव के समीप पहुंचते ही अरुण उर्फ काला, अमित, बब्लू उर्फ प्रदीप, राजकुमार उर्फ पप्पू, अजय उर्फ चुन्नी, गुलाब ने रास्ता रोककर उस पर हमला कर दिया। जिसमें पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 115(2), 126(2) और 352 में मुकदमा दर्ज कर लिया।
- गंभीर धारा में मुकदमों में जुटाने होंगे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य
नए कानून लागू होने के बाद गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने के लिए घटना से जुड़े वीडियो और फोटो अहम भूमिका निभाएंगे। जिसका मुकदमा दर्ज कराते समय वीडियो और फोटो पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
- किसी भी थाने में दर्ज करा सकेंगे मुकदमा
भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू में आम लोगों को एक विशेष सुविधा दी गई है। जिसमें शिकायतकर्ता किसी भी थाने में जाकर साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज करा सकेगा।
- जहां कहेगी पीड़िता, पुलिस वहां करेगी बयान दर्ज
नए कानून में दुष्कर्म पीड़िता को अपनी सुविधा के अनुसार जगह पर बयान दर्ज करा सकेगी। जिसके लिए थाने जाने की जरूरत नहीं होगी। बयान के समय पीड़िता के अभिभावक और महिला पुलिसकर्मी का उपस्थित होना जरूरी किया गया है।