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पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण के गुणाभाग में उलझे रहे नेताजी

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आरक्षण में बदलाव की सुगबुगाहट से धरी रह सकती हैं तैयारियां
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अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां चल रही है। आरक्षण के फार्मूले को लेकर गुणाभाग किया जा रहा है। पिछले चुनाव के सापेक्ष इस बार आरक्षण बदले जाने की चर्चा के बीच तैयारियों में जुटे प्रत्याशियों को जोर का झटका लगा है। चुनाव कार्यालय और डीपीआरओ कार्यालय में दिनभर आरक्षण की प्रक्रिया जानने वालों की आवाजाही लगी रही।
रटौल गांव के नगर पंचायत बन जाने के बाद इस बार जिले में 244 ग्राम पंचायतों के लिए चुनाव होगा। आरक्षण का आधार तय करने की प्रक्रिया चल रही है। संभावना है कि साल 2015 के चुनाव में ग्राम पंचायत जिस वर्ग में आरक्षित थी, अब उनका आरक्षण बदल दिया जाएगा। इससे तैयारी में जुटे संभावित प्रत्याशियों को जोर का झटका लगा है। साथ ही यह भी संभावना है कि पिछले 25 साल से निर्वाचन क्षेत्र अगर आरक्षित रहा है तो इस बार लाभ नहीं मिलेगी। तमाम कयासों और संभावनाओं के बीच चुनाव की तैयारी में जुटे संभावित प्रत्याशी आरक्षण की प्रक्रिया पर निगाह रखे हुए हैं।
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जिले में होगा आंशिक परिसीमन
बागपत। जिले में रटौल के नगर पंचायत बन जाने के बाद इस बार आंशिक परिसीमन होगा। जिससे बागपत, पिलाना और खेकड़ा ब्लॉक की सियासत का गणित बदलने की संभावना है।
रटौल को करना पड़ेगा चुनाव का इंतजार
बागपत। रटौल में प्रधान पद का चुनाव नहीं होगा। नगर पंचायत बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, ऐसे में नगर पंचायत के चुनाव के लिए यहां के लोगों को करीब डेढ़ से दो साल का इंतजार करना पड़ेगा। तब तक प्रशासक कार्यभार देखेंगे।
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ओबीसी महिला में शामिल थे यह गांव
बागपत। पिछले चुनाव में इब्राहिमपुर माजरा, शबगा, बावली, ओसिक्का समेत अन्य गांव में पिछड़ा वर्ग महिला के आरक्षण में शामिल थे, लेकिन इस बार इनका आरक्षण बदलेे जाने की संभावना है।ब
डीपीआरओ कुमार अमरेंद्र का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार आरक्षण की प्रक्रिया की जाएगी। जो गाइडलाइन जारी होगी, उसका जिले में भी पालन किया जाएगा।
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