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एक वीरांगना: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए जिसने कर दी थी पति की हत्या, अब पर्दे पर दिखेगी कहानी

Sun, 01 Aug 2021 12:46 PM IST
Dimple Sirohi शशि धामा, अमर उजाला, बागपत

सार

नीरा आर्य सुभाषचंद्र बोस की रानी झांसी रेजीमेंट की सिपाही थी। उन पर अंग्रेजी सरकार ने गुप्तचर होने का आरोप लगाया था। 26 जुलाई 1998 को हैदराबाद में उनकी मौत हो गई थी।
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वीरांगना नीरा आर्य - फोटो : Amar Ujala baghpat
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विस्तार
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चीन की प्रसिद्ध फिल्मकार झांग हुइहुआंग ग्रेसी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के साहित्यकार तेजपाल सिंह की स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना नीरा आर्य के जीवन संघर्ष पर लिखी गई पुस्तक ‘फर्स्ट लेडी स्पाई’ पर फिल्म बनाने जा रही हैं। बागपत के खेकड़ा में जन्मीं नीरा आर्य नेताजी सुभाष चंद्रबोस की रानी झांसी रेजीमेंट की सिपाही थीं। देश की आजादी के लिए नीरा आर्य ने अंग्रेज सरकार के जुल्म सहते हुए मौत को गले लगा लिया था।

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खेकड़ा के मोहल्ला गिरधरपुर निवासी साहित्यकार तेजपाल सिंह धामा ने बताया कि जनवरी में हुए जयपुर फिल्म फेस्टिवल में चीन की फिल्मकार झांग हुइहुआंग ग्रेसी नीरा आर्य पर लिखी उनकी पुस्तक के अंग्रेजी संस्करण ‘फर्स्ट लेडी स्पाई’ से काफी प्रभावित हुई। 

उन्होंने नीरा आर्य के जीवन संघर्ष पर फिल्म बनाने की मंशा जाहिर की। धामा ने बताया कि उनकी लिखी पटकथा पर झांग हुइहुआंग ग्रेसी निवेश करेंगी। फिल्म के माध्यम से वीरांगना नीरा आर्य की कहानी दुनिया के सामने आएगी। खेकड़ा की वीरांगना बेटी पर बनने वाली फिल्म को लेकर नगरवासी उत्साहित हैं। 

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नेताजी की जान बचाने के लिए कर दी थी पति की हत्या
नीरा आर्य सुभाषचंद्र बोस की रानी झांसी रेजीमेंट की सिपाही थीं। उन पर अंग्रेजी सरकार ने गुप्तचर होने का आरोप लगाया था। नीरा आर्य का जन्म पांच मार्च 1902 को बागपत के खेकड़ा में हुआ था। पांच वर्ष की आयु में उनके माता-पिता का महामारी में निधन हो गया था। इसके बाद सेठ छज्जूमल नीरा को गोद लेकर कलकत्ता चले गए थे। 

नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत के सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ। नीरा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अपने पति की हत्या कर दी थी। 

इस मामले में उन पर लाल किले में मुकदमा चला तो सभी बंदी सैनिकों को छोड़ दिया गया, लेकिन उन्हें पति की हत्या के आरोप में काले पानी की सजा हुई, जहां उन्हें घोर यातनाएं दी गईं। 26 जुलाई 1998 को हैदराबाद में उनकी मौत हो गई थी।
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