फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हजारों साल से हो रही मां भगवती की आराधना 

Sat, 01 Apr 2017 12:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
विज्ञापन
शासक विजय माणिक्य की देवी अंकन युक्त रजत मुद्रा - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
बागपत के बड़ौत में संपूर्ण विश्व  में जहां भारत को अपनी बहु सांस्कृतिक सभ्यता के कारण जाना जाता है, वहीं भारत के पुराने इतिहास पर दृष्टिपात करने पर पता चलता है कि यहां हजारों वर्षों से नारी शक्ति की पूजा विभिन्न देवियों के रूप में की जाने की परंपरा रही है। आदि शक्ति मां भगवती की आराधना जहां आम जन कीर्तन, पूजन व अनुष्ठानों के द्वारा करते है, वहीं शासकीय तौर पर भी विभिन्न राजवंशों द्वारा देवियों की आराधना, उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान प्रचलित की गई स्वर्ण रजत मुद्रा के ऊपर उनका अंकन करके की। शहजाद राय शोध संस्थान के दुर्लभ मुद्रा संग्रह में त्रिपुरा के हिंदू शासकों द्वारा हिंदू देवियों के स्वरूप का अंकन युक्त रजत मुद्राएं मौजूद हैं, जो भारतवर्ष में हजारों वर्ष से देवियों की आराधना करने का एक अहम प्रमाण हैं।
विज्ञापन

  पूर्वी बंगाल की उर्वरा भूमि के मध्य स्थिति त्रिपुरा राज्य के शासकों ने अपने राज्य में विनिमय के साधन के तौर पर उपयोग की जाने वाली चांदी धातु से निर्मित टंका नामक मुद्रा प्रचलित की। इन पर उन्होंने हिंदू देवी और देवता की भक्ति भावना से प्रेरित होकर अपने आराध्य का अंकन किया। वर्ष 1532 से 1564 ई तक त्रिपुरा के हिंदू साम्राज्य पर सम्राट विजय माणिक्य ने शासन किया। 
  विजय माणिक्य ने अपने पूर्व वर्त्ती शासकों द्वारा प्रचलन में लाई हिंदू देवी और देवता के अंकन से युक्त मुद्रा के ही आधार पर रजत मुद्राएं एक अलग ही प्रकार से तैयार कराई। शहजाद राय शोध संस्थान में मौजूद नारी शक्ति की आराधना का दिग्दर्शन कराने वाली त्रिपुरा राज्य की रजत मुद्रा में सम्राट विजय माणिक्य की मुद्रा महत्वपूर्ण है। देवी भगवती दुर्गा के अंकन युक्त रजत मुद्रा पर किए विशिष्ठ अनुसंधान के परिणामों पर प्रकाश डालकर संस्थान के निदेशक अमित राय जैन बताते है  15वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में त्रिपुरा क्षेत्र पर हिंदू शासकों का साम्राज्य था, जो हिंदू देवियों के उपासक थे।
विज्ञापन


 अपनी उपासना भक्ति को आम जन तक पहुंचाने के लिए उन्होंने अपने चांदी के सिक्कों पर देवी दुर्गा का अंकन किया, जो शेर पर सवार है और उनकी बराबर में भगवान शिव का भी अंकन कराया, जो अपनी सवारी नंदी बैल पर बैठे हैं। यह रजत मुद्रा आज वर्तमान में नवरात्रों के दौरान नव देवियों की विशेष आराधना करने वाले भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा का आधार है, क्योंकि इनके ऊपर उनकी आराध्य देवियों का अंकन अत्यंत श्रद्धा पूर्वक किया गया है। त्रिपुरा साम्राज्य के शासकों द्वारा हिंदू देवियों के अंकन से युक्त रजत मुद्रा के अध्ययन से यह भी पता चलता है कि यह सिक्के प्रचलित करने का उद्देश्य साम्राज्य में शांति, देवियों की आराधना व प्रकृति का आदर रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें