बागपत। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगांठ पर दिल्ली में हुए शिक्षा समागम का लाइव प्रसारण दिखाने के लिए बीएसए ने स्कूल खोलने के आदेश जारी जरूर किए। लेकिन बीएसए के आदेश को शिक्षकों ने हवा में उड़ा दिया। किसी जगह स्कूलों पर ताला लटका रहा तो कहीं अधिकतर शिक्षक ही गायब रहे। हालात यह रहे कि स्कूल नहीं खुलने पर बच्चे बाहर खड़े रहे और अभिभावकों ने डीएम व बीएसए को फोटो भेज दिए। इसके बावजूद शिक्षकों पर कोई असर नहीं हुआ।
साढ़े नौ बजे तक भी नहीं खोले गए स्कूल
बिनौली का प्राथमिक विद्यालय नंबर एक नौ बजे तक भी नहीं खोला गया था। विनयपुर के संविलियन विद्यालय में केवल प्रधानाध्यापक पहुंचे थे और सुबह 9 बजे तक भी कमरों के ताले नहीं खुले थे। यहां अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं गायब थी। खेकड़ा के उच्च प्राथमिक विद्यालय नंबर दो पर सवा नौ बजे भी ताला लटका हुआ था। प्राथमिक विद्यालय पिचौकरा में सवा नौ बजे तक केवल प्रधानाध्यापक पहुंचे थे तो अन्य शिक्षक नहीं पहुंचे थे। रटौल के संविलियन विद्यालय में 9 बजे तक कुछ शिक्षक-शिक्षिकाएं पहुंचे थे तो अन्य गायब थे। इनके अलावा भी खेकड़ा व पिलाना ब्लॉक के काफी स्कूल थे, जहां साढ़े नौ बजे तक भी ताला लटका हुआ था।
सिंघावली अहीर में खड़े रहे बच्चे, डीएम व बीएसए को भेजे फोटो
सिंघावली अहीर के प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में ताला लगा रहा, जबकि छुट्टी स्थगित होने की सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित होने पर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेज दिया। वहां बच्चे बाहर खड़े रहे तो ग्रामीण कल्लू ने बीएसए और डीएम को फोटो भेजकर शिकायत कर दी। इसके बाद भी शिक्षकों पर कोई असर नहीं पड़ा। बीएसए ने स्कूल पांच मिनट में खुलवाने की बात जरूर व्हाट्स एप पर लिखी, लेकिन उनकी यह बात भी हवाई साबित हुई और स्कूल को काफी देर बाद खोला गया।
शिक्षक पहुंचे तो बच्चे काफी कम रहे
ऐसे भी काफी स्कूल रहे, जहां शिक्षक जरूर पहुंच गए। लेकिन बच्चे काफी कम पहुंचे तो उनको घर से बुलाकर लाना पड़ा। बागपत के प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में 16 शिक्षकों में 13 मौजूद रहे तो तीन छुट्टी पर रहे। हिसावदा में 14 शिक्षकों में 12 आए हुए थे तो दो छुट्टी पर थे। खेकड़ा के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में सभी छह शिक्षिकाएं पहुंची, लेकिन बच्चे कम रहे। उच्च प्राथमिक विद्यालय बिनौली में प्रधानाध्यापक स्कूल में रहे और बच्चे नहीं आने पर पांच शिक्षक घर-घर उनको बुलाने गए।
स्कूल जरूर खोलने के निर्देश दिए गए थे। जिन स्कूलों को नहीं खोला गया या शिक्षक-शिक्षिकाएं नहीं पहुंचे। उनका पता कराकर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। - आकांक्षा रावत, बीएसए