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पुरा में लाखों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक 

Sat, 25 Feb 2017 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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बागपत के पुरा महादेव मंदिर में भगवान आशुतोष को जलाभिषेक करते शिवभक्त। - फोटो : amar ujala
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बागपत में महाशिवरात्रि पर भगवान आशुतोष के जलाभिषेक के लिए पुरा गांव के श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लाखों शिवभक्तों ने ऐतिहासिक शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। झंडा पूजन के बाद शुभ मुहूर्त में कांवड़ियों ने यहां पहुंचकर जलाभिषेक किया। आईजी अजय आनंद ने निरीक्षण किया।
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बालैनी क्षेत्र के पुरा गांव स्थित प्राचीन मंदिर में शुक्रवार रात से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। हरिद्वार, गोमुख से गंगाजल लेकर आने वाले श्रद्धालु सुबह चार बजे से ही जलाभिषेक के लिए कतार में खड़े होने शुरू हो गए थे। जैसे-जैसे दिन निकलता गया, भक्तों की भीड़ बढ़ती चली गई। मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी लंबी लाइन लगी रही। पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। प्रशासनिक विभाग की मानें तो शुक्रवार सुबह सुबह चार बजे से शाम चार बजे तक एक लाख 11 हजार 500 शिवभक्तों ने मंदिर में जलाभिषेक किया। इसके बाद भी यहां श्रद्धालुओं के जलाभिषेक करने का सिलसिला जारी है। उधर, मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। आईजी अजय आनंद, डीएम हृदय शंकर तिवारी और एसपी अजय शंकर राय ने मंदिर क्षेत्र में व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मेला मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह ने निरीक्षण किया। शिवलिंग के आसपास सुरक्षा के खास इंतजाम रहे।
  मन्नतें मांगी, लगाया जयकारा
बालैनी। पुरा के प्राचीन परशुरामेश्वर महादेव मंदिर पर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने मन्नते मांगी। मेरठ के टीपीनगर निवासी सत्यवीर सिंह का कहना है कि वह 15 वर्षों से लगातार बाबा के दर पर आ रहा है। उसने जो भी सच्चे दिल से मांगा, बाबा ने उसकी हर मुराद पूरी की। सोनीपत की सोनिया का कहना है कि उसने बाबा से बेटे की मन्नत मांगी थी। दिल्ली के सागरपुर निवासी सुभाष और मेरठ के कल्याणपुर निवासी आनंद का कहना है कि भगवान शिव सबकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। 
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दिन चढ़ता गया, भीड़ बढ़ती गई
बालैनी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया वैसे-वैसे मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती चली गई। एलआईयू की रिपोर्ट के मुताबिक सुबह चार बजे से आठ बजे तक 35 हजार शिवभक्तों ने मंदिर में जलाभिषेक किया। 8 से 10 बजे तक 55 हजार, 10 से 12 बजे तक 75 हजार, 12 से 2 बजे तक 96 और 2 से 4 बजे तक 11500 श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।

आकर्षण का केंद्र बनी कांवड़ 
बालैनी। हरिद्वार और गंगोत्री से हजारों शिवभक्त कांवड़ लेकर मंदिर में जलाभिषेक करने पहुंचे। इस दौरान उनकी कांवड़ आकर्षण का केंद्र बनी रही। 

25 साल से लगातार आ रहा मंदिर
अमीनगर सराय। दिल्ली के नजफगढ़ निवासी धर्मपाल सिंह का कहना है कि वह पिछले 25 साल से लगातार बाबा के दर पर आ रहा है। 

सिविल ड्रेस में तैनात रहे पुलिस कर्मी
बालैनी। मंदिर परिसर में खुराफातियां का पता लगाने के लिए पुलिस कर्मियों की सिविल ड्रेस और कांवड़ियों की वेषभूषा में तैनाती की गई थी। पूरे दिन पुलिस कर्मी सुरक्षा के मद्देनजर कांवड़ियों के बीच घूमते रहे। 

भंडारों में ग्रहण किया प्रसाद 
बालैनी। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की ओर से भंडारे आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक के भंडारों में प्रसाद ग्रहण किया।
  शिव के दरबार में महिला श्रद्धालुओं ने झेली मुसीबत
बालैनी। पुरा गांव के परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में फाल्गुनी महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। इनमें महिला श्रद्धालुओं की भी बड़ी संख्या थी। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की एक ही कतार होने के चलते महिला श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां गर्भगृह से पहले मंदिर में प्रवेश के समय और बाहर निकलने तक महिलाओं की अलग से कतार की व्यवस्था नहीं है। गाजियाबाद से जलाभिषेक के लिए पहुंची  पूनम का कहना था कि महिला श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह तक अलग से कतार की व्यवस्था होनी चाहिए। गर्भगृह में प्रवेश और बाहर निकलने की भी महिला और पुरुषों की अलग-अलग कतार लगने से सुविधा होगी। जलाभिषेक के दौरान यहां श्रद्धालुओं में ऐसी होड़ मचती है कि महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

गले में सर्प, होठों पर शिव नाम
बालैनी। शिव की भक्ति में चूर श्रद्धालुओं की मस्ती का ठिकाना नहीं था। शिव के दरबार में सपेरे भी पहुंचे। यहां पर युवा श्रद्धालुओं की टोली  ने गले में सर्प डालकर तस्वीरें खिंचवाई।

क्या कहती है जीर्णोद्धार की कथा?
बालैनी। पुरा गांव में जहां परशुरामेशवर मंदिर हैं, कभी यहां कजरी वन था। मंदिर का निर्माण हुआ, लेकिन लंबे समय तक यह खंडहर रहा था। जीर्णोद्धार से पूर्व कथा प्रचलित है कि एक दिन लंढौरा के राजा रामदयाल की पत्नी इधर घूमने आयी, तो उसका हाथी यहां आकर बैठ गया। काफी प्रयास के बाद भी हाथी नही उठा तो रानी ने उस जगह को खोदने का आदेश अपने सैनिकों को दिया। खोदने पर वहां एक शिवलिंग प्रकट हुआ, तब रानी ने वहा मंदिर का निर्माण कराया। इसी जगह कांवड़िए भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते हैं। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी कृष्ण बोधाश्रम ने भी यहां तपस्या की थी । 
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