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Baghpat News: नवरात्र में अश्व पर होगा माता रानी का आगमन

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बागपत। नौ अप्रैल से नव संवत्सर और वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। इस बार माता रानी घोड़े पर सवार होकर आएंगी और हाथी पर सवार होकर जाएंगी। माता आगमन घोड़े पर होने के कारण शुभ नहीं होगा मगर हाथी पर गमन होना शुभ रहेगा। नव संवत्सर के राजा मंगल और मंत्री शनि होने से यह वर्ष उथल-पुथल वाला रहेगा।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री का कहना है कि नवरात्र पर कलश स्थापना, अनुष्ठान व अखंड दीपक का विशेष महत्व होता है। सोना, चांदी व तांबे का कलश शुभ और मिट्टी का कलश अत्यंत शुभ माना जाता है। शुद्ध देसी घी का अखंड दीपक जलाकर कलश में सभी तीर्थों एवं नदियों का पहले दिन आह्वान किया जाता है। अखंड दीपक पूजा पाठ का साक्षी होता है, जो हमारे कर्म को ईश्वर तक पहुंचाने का कार्य करता है। शास्त्रों में बताया गया है कि मंगलवार को वैधृति योग बन रहा है। वैधृति योग में स्थिर कार्य करना शुभ माना जाता है, जबकि चलायमान कार्य वर्जित होते है। मंगलवार को सुबह 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 28 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ रहेगा। शुभ मुहूर्त में कलश की स्थापना करने से भक्तों पर माता की कृपा बरसेगी। कलश की स्थापना ईशान कोण में करनी चाहिए। यह स्थान देव स्थान के नाम से जाना जाता है और यह जल का भी स्थान है। 16 अप्रैल को दुर्गा अष्टमी व 17 अप्रैल को रामनवमी मनाई जाएगी।
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