अष्टानिका पर्व के छठे दिन पूजा करते जैन श्रद्घालु।
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श्री पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड चल रहा अष्टानिक महापर्व
सिद्धचक्र महामंडल विधान में चढ़ाए 512 अर्घ्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू में श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर कमेटी के तत्वावधान में चल रहे अष्टानिक महापर्व के सातवें दिन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में 512 अर्घ्य चढ़ाए गए। विधानाचार्य नरेश जैन ने कहा कि मनुष्य का अहंकार और मोह सबसे बड़ी हिंसा है। अहिंसा परम धर्म का मार्ग है।
पंडित नरेश जैन के सानिध्य में सौधर्म इंद्र संजय जैन, रश्मि जैन व यज्ञनायक जयपाल जैन, शकुंतला जैन व धनपति कुबेर नीशू जैन, माही जैन द्वारा रत्न वर्षा की गई। सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा, भक्तामर पूजा व विधान किया गया। इसके बाद श्री सिद्ध चक्र विधान की पूजा में मंडले पर ऋद्धि के 512 अर्घ्य चढ़ाए गए। विधानाचार्य नरेश जैन ने कहा कि अहिंसा परम धर्म का मार्ग है। मगर, अहिंसा को समझने से पूर्व हमें यह जानना होगा कि हिंसा क्या है। मनुष्य का अहंकार और मोह सबसे बड़ी हिंसा है। कहा कि इस संसार की बनावट ही ऐसी है कि यहां सुख के साथ दु:ख भी अवश्य आते हैं। विपरीत परिस्थितियों का आना-जीवन का स्वाभाविक गुण है। कहा कि मानव से प्रेम करो। रात्रि में श्री जी संगीतमयी भव्य आरती की गई। इसमें सतीश जैन व प्रदीप जैन के मधुर भजनों पर भक्त झूमने लगे। धार्मिक प्रश्न प्रतियोगिता हुई, जिसमें विजेताओं को अजय जैन ने सम्मानित किया। इस दौरान सत्येंद्र जैन, अनिल जैन, आदिश जैन, रवि जैन, सुमित जैन, संजीव जैन मौजूद रहे।