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Baghpat: महाभारतकालीन लाक्षागृह को वक्फ की संपत्तियों से हटाया गया, न्यायालय के इस आदेश के बाद आया ये निर्णय

Sun, 10 May 2026 10:31 PM IST
Pratyush Sharma न्यूज़ नेटवर्क, संवाद एजेंसी, बागपत

सार

बागपत स्थित महाभारतकालीन लाक्षागृह को सरकार ने वक्फ की संपत्तियों से हटाने का निर्णय लिया है। पांच फरवरी 2024 के न्यायालय के निर्णय के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसमें लाक्षागृह को अब दरगाह नहीं माना जाएगा। पांच महीने पहले ही सरकार के उम्मीद पोर्टल पर लाक्षागृह को दरगाह के रूप में दर्ज किया गया था।
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महाभारतकालीन लाक्षागृह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बागपत। सरकार ने महाभारतकालीन लाक्षागृह को वक्फ की संपत्तियों से हटा दिया है। इसे अब दरगाह नहीं माना जाएगा, जबकि पांच महीने पहले इसे उम्मीद पोर्टल पर दरगाह के रूप में दर्ज किया गया था। यह कदम पांच फरवरी 2024 को न्यायालय के उस निर्णय के बाद आया है, जिसमें इसे लाक्षागृह माना गया था। बरनावा के रहने वाले मुकीम खान ने वर्ष 1970 में मेरठ की अदालत में वाद दायर किया था। इसमें लाक्षागृह गुरुकुल के संस्थापक ब्रह्मचारी कृष्णदत्त महाराज को प्रतिवादी बनाया गया था। याचिका में कहा गया था कि बरनावा में प्राचीन टीले पर खसरा संख्या 3377 की 36 बीघा 6 बिस्से 8 बिस्वांसी जमीन है। इसमें उन्होंने लाक्षागृह को दरगाह, बदरुद्दीन की मजार और कब्रिस्तान होने का दावा किया था।

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हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने किये थे दावे

वर्ष 1997 में बागपत के जिला बनने पर यह मुकदमा मेरठ से यहां के न्यायालय में ट्रांसफर हुआ था। हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों ने अपने दावे को सही साबित करने के लिए न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए। इस प्रकरण में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम ने पांच फरवरी 2024 को प्राचीन टीले को लाक्षागृह माना और मुस्लिम पक्ष के दावे को खारिज कर दिया। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने जिला एवं सत्र न्यायालय में निर्णय के खिलाफ अपील दायर कराई, जिसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय प्रथम में चल रही है। इसके बावजूद दिसंबर 2025 में देशभर में वक्फ की सभी संपत्तियां सरकार के उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करने के आदेश हुए तो लाक्षागृह को दरगाह बताकर उसपर दर्ज कर दिया गया।


विरोध जताने के बाद शुरू हुई कार्रवाई

लाक्षागृह को सरकार के उम्मीद पोर्टल पर वक्फ की संपत्ति बताते हुए दरगाह के रूप में दर्ज करने का लोगों को पता चला तो इसका विरोध शुरू किया गया। श्री गांधी धाम समिति गुरुकुल लाक्षागृह के मंत्री राजपाल त्यागी ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई तो इसको वक्फ की संपत्ति से बाहर रखने के लिए कार्रवाई शुरू की गई। अब कई महीने बाद इसको वक्फ की संपत्ति से बाहर करते हुए उम्मीद पोर्टल से हटाया गया।


कैलाशचंद तिवारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बोले

न्यायालय के आदेश को देखने के बाद पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी गई, क्योंकि इस पर जिला स्तर से कुछ नहीं किया जा सकता था। लाक्षागृह से संबंधित आदेश में सभी तथ्यों को देखते हुए उसे उम्मीद पोर्टल से हटा दिया गया है। 
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