बागपत में धान की फसल काटती महिलाएं।
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बागपत। उम्मीदों की फसल धान इस बार खेतों में लोट हो गई। किसी तरह किसानों ने इसे समेटा, लेकिन लागत भी वसूल नहीं हो पाई। हरियाणा और दिल्ली की मंडियों में धान लेकर पहुंच रहे जिले के किसान बेहद मायूस हैं। दिल्ली में तो किसानों को उधार में आढ़तियों को धान देना पड़ रहा है।
बागपत में धान की खरीद की कोई व्यवस्था नहीं हुई, जिस कारण किसानों की समस्या और अधिक बढ़ गई। इस बार 65 सौ हेक्टेयर में धान की फसल थी। गेहूं और गन्ने के बाद धान से भी किसानों को मायूसी ही मिली। क्योंकि धान की फसल में कीड़े के चलते अधिक नुकसान हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों का तर्क है कि पकी फसल में पानी दिए जाने से अधिक नमी होने के कारण कीड़े ने तने को खा दिया, जिस कारण फसल खेत में ही गिर गई। इससे पैदावार प्रभावित हुई। पिछले साल की अपेक्षा इस बार पैदावार में काफी गिरावट दर्ज की गई है। खुद डीएम हृदय शंकर तिवारी ने कई खेतों का निरीक्षण कर कम पैदावार का पिछले दिनों जायजा लिया था, उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को नुकसान का कारण जानने के निर्देश भी दे रखे हैं।
क्या है भाव की स्थिति?
कम पैदावार से जूझ रहे किसानों को अब भाव भी झटका दे रहा है। गन्नौर मंडी से लौटे किसान अंकित कुमार का कहना है कि अलग-अलग वैरायटी के धान का भाव अलग-अलग है। 1509 वैरायटी की खरीद 2121 रुपये प्रति क्विंटल की जा रही है, जबकि 1121 वैरायटी के दाम 22 सौ रुपये प्रति क्विंटल है। बागपत में धान खरीद की कोई व्यवस्था नहीं की गई। इस कारण किसानों को धान बेचने के लिए हरियाणा और दिल्ली जाना पड़ता है।
दो दिन में जांच के बाद देंगे रिपोर्ट
उप कृषि निदेशक धुरेंद्र कुमार का कहना है कि किसानों का नुकसान हुआ है। कृषि विभाग के अधिकारियों को दो दिन में मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। अधिकतर किसानों की फसल का बीमा है, इसलिए मुआवजा दिलाए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। नुकसान के कारणों का पता लगाया जा रहा है।