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जनपद में सैकड़ो अतिकुपोषित बच्चों के जीवन पर मंडरा रहा खतरा

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बड़ौत। कोरोना की तीसरी लहर की चिंता अभिभावकों को सताने लगी है। वहीं, दूसरी ओर अधिकारियों की अनदेखी के चलते सैकड़ों अतिकुपोषित बच्चों के जीवन पर खतरा बढ़ रहा है। आलम यह है कि एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) पर अतिकुपोषित बच्चों को भेजने की प्रक्रिया ठप है। गांवों में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों पर सन्नाटा है। यही कारण है कि इस समय एनआरसी के दस बेड खाली पड़े हैं।
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जनपद में 1338 अंागनबाड़ी केंद्र हैं। जिनमें 800 से अधिक अतिकुपोषित बच्चे चिह्नित हैं। कोरोना की तीसरी लहर का हमला बच्चों पर होने की आंशका है। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन उससे निपटाने की तैयारी में जुटे हैं। वहीं, अतिकुपोषित बच्चों पर हर पल खतरा बढ़ रहा है। इसके बावजूद उनका ख्याल किसी भी स्तर पर नहीं रखा जा रहा है। हालांकि उन्हें एनआरसी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ सीडीपीओ की है। जिन पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी रहती है। कोरोना संक्रमण के दौर में अतिकुपोषित बच्चों पर किसी का ध्यान नहीं है।
हाल जानने से भी कतरा रहे
आंगनबाड़ी व आशा की जिम्मेदारी समय-समय पर अतिकुपोषित बच्चों के घर जाकर अभिभावकों से स्वास्थ्य की जानकारी लेने की है। कोरोना काल में आशाओं व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उनसे डर लग रहा है। उन्हें आशंका है कि वे खुद कोरोना की चपेट में न आ जाएं।
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एनआरसी भेजने की प्रक्रिया ठप
आंगनबाड़ी केंद्रों को देखने वाला कोई नहीं है। बताया जा रहा है कि ज्यादातर केंद्रों पर लंबे समय से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की आवाजाही बंद है। इसलिए अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें एनआरसी भेजने की प्रकिया भी ठप है। संवाद
ये बोले सीडीपीओ
सीडीपीओ बड़ौत सारधा देवी व छपरौली सीडीपीओ जानकी देवी ने बताया कि अतिकुपोषित बच्चों की इम्यूनिटी बहुत कमजोर होती है। इसलिए उनमें कोरोना संक्रमण संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। उन्हें भी अतिकुपोषित बच्चों की चिंता है परंतु आजकल प्रशासन का पूरा जोर निगरानी समिति के कार्यों पर है।
ये बोले सीएचसी अधीक्षक
एनआरसी पर बच्चों को भेजने को लेकर कई बार सीडीपीओ से बातचीत की जा चुकी है, लेकिन उनकी डयूटी निगरानी समिति में लगी है। जिस कारण फिलहाल अतिकुपोषित बच्चों पर ध्यान नहीं जा रहा है। बताया कि इस समय एनआरसी के सारे बेड खाली पड़े है, जबकि शासन की ओर से सीधे आदेश है कि अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी पर भर्ती कराया जाए।
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