काठा नाव हादसे के दौरान देवदूत’ बनकर डूबते लोगों की जान बचाने वाले गोताखोरों को गणतंत्र दिवस के दिन पुलिस लाइन में सम्मानित किया जाएगा। हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी।
गोताखोरों ने एनडीआरएफ के पहुंचने से पहले ही 20 से ज्यादा लोगों को यमुना से निकाला था। इसके अलावा भी कई बार गोताखोर यमुना में डूबने वाले लोगों की जान बचाते रहे हैं। उत्तराखंड़ की केदारनाथ त्रासदी के दौरान भी उन्होंने अनेक श्रद्धालुओं की जान बचाई थी।
बागपत के गायत्रीपुरम निवासी गोताखोर इरफान, पुराना कसबा निवासी नौशाद, इरफान और शरीफ की चौकड़ी किसी पहचान की मोहताज नहीं है। काठा गांव में 14 सितंबर की सुबह नाव डूबी तो यही चार तैराक थे, जो सबसे पहले यमुना में कूदे और 20 से अधिक लोगों को सकुशल बाहर निकाला। हालांकि यमुना से 19 लाशें भी एक-एक करके इन्हीं
गोताखोरों ने बाहर निकाली थी। बचाव और राहत कार्य के लिए उन्हें 15 हजार रुपये का इनाम दिया गया था। इस बार गणतंत्र दिवस पर इन बहादुर गोताखारों को पुलिस लाइन में होने वाले समारोह में प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। कोतवाली प्रभारी दिनेश कुमार का कहना है कि गणतंत्र दिवस पर गोताखोरों को पुलिस कप्तान सम्मानित करेंगे।
केदारनाथ तबाही में बन गए थे मसीहा
इरफान ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ पिछले करीब 15 वर्षो से इस कार्य को कर रहा है। उत्तराखंड़ की केदारनाथ त्रासदी के दौरान जिला प्रशासन ने उन्हें वहां भेजा था। उन्होंने 32 श्रद्धालुओं की जान बचाई थी।
एनडीआरएफ के आने से पहले मिशन पूरा
नाव हादसे के बाद एनडीआरएफ की टीम के आने से पहले ही गोताखोरों ने मिशन पूरा कर लिया था। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने दो दिन तक सर्च अभियान चलाया, लेकिन कोई डूबा हुआ व्यक्ति नहीं मिला था।
खेलते-खेलते सीखे तैराकी, बचाने लगे जिंदगी
इरफान का कहना है कि उसने और उसके अन्य साथियों ने खेलते-खेलते यमुना में तैराकी सीख ली। जब तक तक रोज यमुना घाट पर नहीं घूम लेते चैन नहीं मिलता। कई बार यमुना में लड़कों को डूबने से बचाया। धीरे-धीरे पुलिस उनसे मदद लेने लगी। अब तक वह एक सौ से ज्यादा लोगों को डूबने से बचा चुके हैं, जबकि इतनी ही लाशें तालाब और नदियों से निकाल चुके हैं।
आंखों में रोशनी कम लेकिन मौत से लड़ता है इरफान
गायत्रीपुरम निवासी गोताखोर इरफान को आंखों से बेहद ही कम दिखाई देता है लेकिन गोताखोर चौकड़ी का संचालन वही करता है। काठा गांव में नाव के यमुना में समाने का पता चलते ही गोताखोर इरफान अपने तीन साथी शरीफ, नौशाद और इमरान के साथ गांव पहुंच गया था।
वह कहता है कि आंखों से कम दिखता है। तैराकी में उस्ताद इरफान बताता है कि पानी में उतरने के बाद साथियों के साथ समन्वय बनाकर वह सतह पर जाकर बैठ जाते हैं। इसके बाद वहीं से अभियान का संचालन कर जिंदगी बचाने की कवायद में जुटते हैं। आंखों की कम रोशनी की वजह से कभी परेशानी नहीं हुई।