हे... यमुना मईयां कहा गई मेरी बड़ी बहन: बागपत यमुना में नाव हादसे में लापता हुई हुई किशौरी मौनी की त?
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बागपत। यमुना नदी के किनारे पर दिनभर भावनाओं का ज्वार उठा। पानी में डूबी महिला राजेश और किशोरी मोनी के परिजन किनारे पर डटे रहे। परिवार की महिलाएं, रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग हिम्मत बंधाने आए। उम्मीद लगाई गई कि दोनों का कोई सुराग मिलेगा, लेकिन देर रात तक दोनों के विषय में जानकारी नहीं मिल सकी है।
पहले बृहस्पतिवार की देर रात तक राजेश और मोनी के परिजन यमुना किनारे पर बैठे रहे। महिला राजेश के चार बच्चे हैं। बड़ी बेटी शिवानी (14), शिया (12), वंश (10) और शिवम (8) साल का है। मां घर नहीं लौटी। बच्चे बिलख रहे हैं। यमुना नदी के किनारे पर दिनभर चारों बच्चे पिता करण सिंह और मौसा पवन के साथ डटे रहे। दुआ की गई कि मां सुरक्षित लौट आए, लेकिन राजेश का देर रात तक कोई सुराग नहीं लग सका। बच्चे रोते रहे और परिजन उन्हें हिम्मत बंधाते रहे। परिवार के पवन ने बताया कि राजेश का सुराग नहीं लग सका है, घर में गम का माहौल है। यमुना में डूबा रुग्घे कश्यप की बेटी मोनी का भी सुराग नहीं लगा। परिवार के लोग दिनभर यमुना नदी के किनारे पर डटे रहे। रिश्तेदार आते रहे। घरों में चूल्हे नहीं जले।
अंधेरे के कारण 26 घंटे बाद रोका गया सर्च अभियान
बागपत। अंधेरा घिर जाने के कारण 26 घंटे बाद सर्च अभियान रोक दिया गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के अलावा स्थानीय गोताखोर वापस लौट गए। एसडीएम रामनयन ने पुष्टि करते हुए बताया कि अंधेरा होने के कारण अभियान रोका गया है। शनिवार सुबह फिर सर्च अभियान चलेगा। उधर, राजेश के परिजनों ने कलक्ट्रेट में पहुंचकर अभियान चलाने की मांग रखी। जिस पर अधिकारियों ने उन्हें अंधेरे की वजह से परेशानी होने का कारण बताया।
परिवार का सहारा थी नसरीन
बागपत। माता कॉलोनी निवासी साबिर बीमार रहता है। उसकी पत्नी शाइना और बेटी नसरीन खेतों में कार्य कर घर चला रही थी। नसरीन की मौत से गम का माहौल है। परिवार में बेटी शमा, शमीना, जन्नत, बुसरा, रानी और भाई इंतजार है।