बागपत की बड़ाौत तहसील में बकाया भुगतान के लिए धरनारत किसानों और मलकपुर मिल प्रबंधन के बीच सहमति बन गई है। अस्सी-अस्सी करोड़ की तीन किस्तों में किसानों को पिछले साल का भुगतान मिलेगा। सहमति के बाद शनिवार से मिल नए सत्र की पेराई शुरू कर देगी। किसानों के बीच पहुंचे रालोद महासचिव जयंत चौधरी ने कहा कि खाप चौधरी जो फैसला करेंगे, वही मान्य होगा। देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि किसान का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा। मिल मालिकों ने वादा तोड़ा तो फिर से किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा।
शुक्रवार को किसानों के बीच पहुंचे जयंत चौधरी ने कहा कि किसानों के हित के लिए खाप चौधरी जो फैसला करेंगे, वहीं मान्य होगा। कई घंटे चली पंचायत के बाद मिल प्रबंधन वार्ता के लिए पहुंचे। एसडीएम दीपाली कौशिक की मौजूदगी में मोदी ग्रुप के प्रशासनिक अधिकारी सुनील गुप्ता, चीफ एग्जीक्यूटिव एमपी बंसल, विपिन चौधरी और विजय जैन की देखखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह, चौबीसी खाप के चौधरी सुभाष, दांगड़ खाप की ओर से सुधीर प्रधान वार्ता के लिए पहुंचे। वहां करीब एक घंटे तक वार्ता चली। मिल अधिकारियों ने 80 करोड़ रुपये दिसंबर, 80 करोड़ रुपये जनवरी और 80 करोड़ फरवरी में देने की बात कही। इस पर किसान नेताओं ने सहमति जताई। चौधरी सुरेंद्र सिंह ने किसानों के बीच आकर इसकी घोषणा की। यहां धरना खत्म करने का एलान भी किया गया। छपरौली विधायक वीरपाल राठी, चौधरी अलबेल सिंह, चौधरी यशपाल सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री राजेंद्र शर्मा, सुखवीर गठीना, पूर्व विधायक डॉ. अजय कुमार, डॉ. महक सिंह, सहेंद्र सिंह रमाला, कपिल चौधरी, बागपत ब्लाक प्रमुख सुभाष गुर्जर, जिला पंचायत सदस्य ठाकुर प्रदीप, अश्वनी तोमर, दीपक, विराज तोमर, राजू सिरसली, निशांत तोमर, राजेंद्र चौधरी, विक्रम राणा, अजय रमाला, रामकुमार चेयरमैन, विकास प्रधान, सूरज सोलंकी, सुभाष नैन, ऋषि ठेकेदार ने भी विचार रखे। संचालन पूर्व विधायक साहब सिंह ने किया।
अपनों का कालाधन सफेद कर रही भाजपा
बड़ौत। रालोद महासचिव जयंत चौधरी ने कहा कि भाजपा अपने लोगों के कालेधन को सफेद करने में जुटी हुई है। किसान समस्याओं से प्रदेश और केंद्र सरकार को कोई लेना-देना नहीं है। बकाया भुगतान नहीं होने से किसान आर्थिक समस्याएं झेल रहे हैं। बैंकों में कैश नहीं मिलने से समस्या और अधिक गंभीर हो गई है। शुक्रवार को तहसील में किसानों को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि सरकार इकबाल से चलती है डंडे के बल से नहीं। पिछले साल का भुगतान अब तक मिला, ऐसे में किसान क्या करें। गन्ने का भुगतान दिलाने का दायित्व सरकार का है। सरकार ने मिल मालिकों को 12 सौ करोड़ ब्याज माफ कर दिया, यह हक किसानों का था। किसान कर्जबंद हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री लाल किले से झूठ बोलते हैं कि जनधन के खातों में कोई कालाधन नहीं है। 10 घराने ऐसे हैं, जिनका सरकार कालाधन सफेद करने में लगी हुई है। पहले किसानों को भुगतान मिलना चाहिए था, लेकिन केंद्र और प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में किसान है ही नहीं। अध्यक्षता देशखाप चौधरी सुरेंद्र सिंह ने की। रणवीर सूप, रणवीर छपरौली, अरुण तोमर बॉबी, सुरेश राणा, मोहित मुखिया, सहेंद्र प्रमुख, पप्पू मुखिया, सोमपाल राठी, जिला बार संघ अध्यक्ष जयवीर तोमर, सुभाष पहलवान, इरफान मलिक, जमीरूदीन अब्बासी, ओमवीर ढाका, वेदपाल पंवार, राममेहर, कर्नल ब्रह्मपाल सिंह, रामपाल धामा, विपिन पुनिया, रबान शामिल रहे।
चौबीसी को मंजूर नहीं फैसला, पंचायत आज
बड़ौत। मिल मालिक और खाप चौधरियों के बीच वार्ता पर सहमति में भी दरार पड़ गई है। चौसीबी के चौधरी सुभाष का कहना है कि उन्हें फैसला मंजूर नहीं है। कम से कम किसानों को एकमुश्त दो सौ करोड़ का भुगतान करना चाहिए था। शनिवार को छपरौली में पंचायत बुलाई गई है।
मिल प्रबंधन के साथ वार्ता में शामिल रहे चौबीसी चौधरी सुभाष का कहना है कि मिल प्रबंधन दिसंबर में 50 करोड़ देने की बात कह रहा था, जबकि उन्होंने दो सौ करोड़ की मांग रखी थी। देशखाप के चौधरी सुभाष ने इसके बाद अस्सी करोड़ की बात कही है। उन्होंने पंचायत में भी इसका विरोध किया और अब इस फैसले के विरोध में शनिवार को छपरौली में पंचायत बुलाई गई है। बड़ौत में जो फैसला हुआ, वह किसानों के साथ धोखा है। चौबीसी इस फैसले में शामिल नहीं है।