संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटीरी। रमजान के तीसरे अशरे में मुसलमान एतकाफ में बैठते हैं। एतकाफ को अल्लाह की खास इबादत माना गया है। रमजान को अल्लाह की रहमतों का महीना कहा जाता है। पूरी साल शिद्दत के साथ हर मुसलमान इस पाक महीने का इंतजार करता है। माह-ए-रमजान मुसलमान नियमों का पालन करते हुए रोजे रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं।
मौलाना आजम कासमी ने कहा कि रमजान के महीने को दस-दस दिनों के तीन हिस्सों में बांटा गया है। इन्हें पहला अशरा, दूसरा अशरा और तीसरा अशरा कहा जाता है। हर अशरे का अलग महत्व माना गया है। पहला अशरा अल्लाह की रहमत का, दूसरा अशरा गुनाहों की माफी और तीसरा अशरा जहन्नम की आग से खुद को बचाने का होता है। रमजान के तीसरे अशरे को सबसे खास बताया गया है। मोहम्मद पैगम्बर भी रमजान के आखिरी दिनों में एतकाफ में बैठते थे।
- क्या होता है एतकाफ
रमजान के आखिरी दस दिनों यानी तीसरे अशरे के दौरान तमाम मुसलमान एतकाफ में बैठते हैं। मुसलमान मस्जिद के कोने में बैठकर अल्लाह की इबादत करते हैं और खुद को परिवार और दुनिया से अलग कर लेते हैं। इन दस दिन तक वह एक ही जगह पर बैठकर खाते-पीते हैं, सोते-जागते हैं और नमाज-कुरान पढ़ते हैं। महिलाएं एतकाफ के लिए घर के किसी कमरे के एक कोने में पर्दा लगाकर बैठती हैं। एतकाफ में बैठने वालों पर अल्लाह की खास रहमत होती है। अल्लाह उनके सारे गुनाहों को माफ कर देते हैं और उन्हें जहन्नुम की आग से बचाते हैं।