बड़ौत। अभी यहां आना मना है... ईएनटी डॉक्टर छह माह से लापता है। बागपत से लेकर लखनऊ तक चिट्ठी जारी हो चुकी है, लेकिन सर्जन नौकरी पर वापस लौटने को तैयार नहीं है। ऐसे में अब एक डॉक्टर के भरोसे 16 लाख लोगों का जिम्मा है। मजबूरन जनपद में हर माह 1500 से अधिक कान रोग से ग्रस्त मरीज दिल्ली, मेरठ और नोएडा सहित अन्य जगहों पर इलाज कराने को मजबूर है।
हर साल तीन मार्च को दुनियाभर विश्व श्रवण दिवस मनाया जाता है। इसके माध्यम से लोग बहरेपन और सुनने की हानि को रोकने, कान और सुनने की देखभाल का समर्थन करने के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाती है।
मगर हैरानी की बात यह है कि बड़ौत सीएचसी से पिछले छह माह से ईएनटी सर्जन लापता है। मजबूरन सीएचसी पर पहुंचने वाले मरीज जिला अस्पताल पहुंचे रहे हैं। यहां पर भी मात्र एक ईएनटी चिकित्सक डाॅ. सुनील तैनात हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े पर गौर करें तो जनपद में हर माह पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल में लगभग 2500 से 3000 हजार मरीज कान रोग से संबंधित पहुंच रहे हैं, लेकिन मात्र एक ईएनटी के चलते लगभग 1500 से अधिक मरीज यहां से अपना इलाज दिल्ली, मेरठ व नोएडा कराने को मजबूर है।
सीएमओ डाॅ. दिनेश कुमार का कहना है कि ईएनटी सर्जन को बुलाने के लिए कई पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन वे वापस नहीं आ रहा है। अब जनपद में मात्र एक ईएनटी सर्जन के भरोसे संबंधित मरीज है।
कोट...
जिस तरह युवाओं में ईयरफोन लगाने की लत बढ़ रही है, यह चिंता का विशेष है, क्योंकि थोड़ी सी असावधानी से व्यक्ति बहरा हो सकता है। इसके अलावा, श्रवण हानि से अवसाद, चिंता और अकेले महसूस करने जैसी भावनात्मक और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। - डाॅ. विजय कुमार, सीएचसी अधीक्षक
इस प्रकार कर सकते हैं कानों का बचाव
- कान को बहरेपन से बचाने के लिए हमें सबसे पहले तेज आवाज के संपर्क में आने से बचना होगा। ईयरफोन का इस्तेमाल कम करना होगा। कान की अच्छी तरह से सफाई करें। इसके बाद भी अगर जरूरत पड़े तो हमें चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। - डाॅ. सुनील कुमार, ईएनटी सर्जन