ये बोली बाल कल्याण समिति की सदस्य
बाल कल्याण समिति की सदस्य रेखा रानी चौहान ने बताया कि पिछले दो साल में घर से भागने वाले 13 से 17 साल की उम्र के बच्चों की तादाद दोगुनी हो गई है। चिंताजनक यह है कि इनमें 65 फीसदी से ज्यादा लड़कियां हैं। ज्यादातर बच्चे अपने सौतेले मां-बाप से प्रताड़ित व आहत थे। कई के मन में यह बात घर कर गई थी कि यदि उनके मां-बाप होते तो उनसे कितना प्यार करते, सौतेले मां-बाप उनसे प्यार नहीं करते। बताया कि पिछले दो साल में पुलिस और समिति ने लगभग 250 से अधिक बच्चे जम्मू-कश्मीर, नेपाल, हरिद्वार, नोएडा, गुड़गांव, दिल्ली आदि जगहों से बरामद किए हैं।
ये बोली मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष
दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अंशु अग्रवाल के अनुसार ऐसे घरों में बच्चों को खुशनुमा माहौल नहीं मिल पाता, जिस कारण बच्चे घर में परेशान हो जाते हैं। माता-पिता को चाहिए कि 14-17 की उम्र में बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें। उनकी दिनचर्या के बारे में बात करें, अपनी बताएं। उनकी बातों पर गुस्सा करने के बजाए प्यार से समझाकर हल निकालें। मोबाइल गेम बिल्कुल बंद करने के बजाय कम खेलने को कहें। बच्चों को अच्छे संस्कार जरूर सिखाएं।
ये बोले सीओ
सीओ युवराज सिंह का कहना है कि दो साल में सैकड़ों ऐसे बच्चों को पुलिस बरामद कर चुकी हैं, जो घर में अपनी सौतेली मां या अपने सौतेले पिता के व्यवहार से नाखुश थे। मिलने के बाद बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया जाता है। उसके बाद बाल कल्याण समिति के सदस्य बच्चों की काउंसिलिंग कर उनके परिजनों के पास भेज देते हैं या फिर शेल्टर होम। मां-पिता को बच्चों से अच्छा व्यवहार करना चाहिए।