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‘शहर में रहे तो भूखे मर जाएंगे’

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पैदल बागपत पहुंचने पर जैसे ही यूपी की रोडवेज बस से अपने गांव जालौन पहुंचने की उमीद जगी तो कंधे पर प - फोटो : BAGHPAT
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बागपत। जिले से गुजरने वाले प्रवासी मजदूरों के चेहरे पर घर जाने की बेबसी और आंखों में मीलों के सफर का दर्द झलक रहा है। हरियाणा से लौटकर अपने घरों को जा रहे मजदूरों का कहना है कि शहर की भूखमरी से तो गांव की सूखी रोटी अच्छी है। प्रवासी मजदूर बलिया का रामनरेश पत्नी सविता और दो मासूम बच्चों के साथ पैदल मीलों का सफर तय कर शनिवार को बागपत पहुंचा। चेहरे पर थकान और मजबूरी साफ दिख रही है। कहना था कि उसे कहां पता था कि उसे इतनी परेशानियां उठानी पड़ेगी। अब वह कभी लौटकर वापस नहीं आएगा। सुल्तानपुर के राजन का कहना है कि जेब के पैसे पैसा नहीं रहा, दाने-दाने को मोहताज हो गए। चांदीनगर क्षेत्र में एक्सप्रेस वे गुजर रहे बदायूं के हरिमोहन ने बताया कि रोजगार नहीं रहा और जेब खाली होने से भूखे मर रहे थे। फैक्ट्री मालिक ने मदद नहीं की तो पैदल ही घर जाने की ठानी और सफर शुरू कर दिया।
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तेज धूप में बैठा कर की स्क्रीनिंग
खेकड़ा। शहर स्थित लख्मीचंद पटवारी कालेज में प्रवासी मजदूरों को भेजने के लिए अस्थाई आश्रय स्थल बनाया गया है। शनिवार को भी स्क्रीनिंग कराने के बाद यहां मजदूरों को बसों से रवाना किया गया। आरोप है कि तेज धूप में ही मजदूरों की स्क्रीनिंग की गई। मजदूर दिन भर तेज धूप में जलते रहे। कुछ मजदूरों ने विरोध भी किया, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें समझा बुझा करा शांत किया।

शहर स्थित अस्थाई आश्रय स्थल पर अपने ग्रह जनपद लौटने से पूर्व फोन पर अपने दादा से बात करता एक छोटा ब- फोटो : KAHKRA

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