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बैंक से कैश न मिलने पर हाईवे किया जाम

Thu, 01 Dec 2016 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बागपत
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सिंडिकेट बैंक के बाहर हंगामा करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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बड़ौत में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा पांच सौ व एक हजार के नोट पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा के 22वें दिन भी बुधवार को पैसे निकलवाने को लेकर बैंक और एटीएम पर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। कैश न मिलने पर ग्राहकों ने हंगामा करते हुए दिल्ली-सहारनपुर हाईवे जाम कर दिया। पुलिस ने आश्वासन देकर जाम खुलवाया। बड़े नोट पर प्रतिबंध लगाने के बाद ग्राहकों को नई करेंसी लेने को लेकर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पैसे निकलवाने को लेकर ग्राहक सुबह साढ़े आठ बजे बैंकों व एटीएम के साथ लाइनें लगाकर खड़े हो जाते हैं, यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक बैंक बंद न हो जाए। 22वें भी नगर में पंजाब नेशनल स्कूल, सिंडिकेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक के अलावा बावली गांव की सिंडिकेट बैंक शाखाओं में पैसे न मिलने पर ग्राहकों ने जमकर हंगामा किया।  ग्राहकों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी व्यापारियों से मिले हुए हैं। ग्राहकों को नई करेंसी देने से मना किया जा रहा है, जबकि व्यापारियों व अन्य उद्योगपतियों को चोरी छिपे खुले पैसे दिए जा रहे हैं, इसको लेकर उनकी बैंक कर्मचारियों से नोकझोंक हुई।  हंगामा बढ़ता देख पुलिस मौके पर पहुंची तो ग्राहक उसने सभी उलझ गए। आक्रोशित ग्राहकों ने पंजाब नेशनल बैंक के सामने दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर जाम लगा दिया।  पुलिस ने ग्राहकों को समझकर जाम खुलवाया। हंगामा करने वालों मेें रवींद्र, सुनील, यशवीर, जयवीर, राजवीर, ओमवीर, हरेंद्र, प्रेमपाल, सोनू, अनिल, प्रवेंद्र, सुखवीर, जसवंत आदि मुख्य रूप से शामिल रहे। बैंकों पर हंगामा, नहीं मिला कैश छपरौली। क्षेत्र के कूड़ी गांव स्थित सेंट्रल बैंक पर ग्राहकों ने टोकन को लेकर जमकर हंगामा किया और इस बीच ग्राहकों में हाथापाई होने लगी तो पुलिस ने मोर्चा संभाला और बड़ी मशक्कत से भीड़ पर काबू पाया। ग्राहकों को आरोप था कि बैंक के कर्मचारी अनियमितता करते हैं जिससे बार बार बैंक में कैश समाप्त हो गया तो वहां पर भीड़ के चलते अफरातफरी मंच गई और पक्षपात को लेकर हंगामा होने लगा।  बड़ी मुश्किल से मामला शांत हो पाया। उसके बाद ग्राहकों  ने कर्मचारियों पर अनियमितता का आरोप लगाकर उपभोक्ताओं ने जमकर हंगामा किया।  ग्राहक आपस में ही उलझ गए और शोर शराबे के चलते बैंक का भी काम बाधित रहा।   इस संबंध में शाखा प्रबंधक रवींद्र सैनी का कहना है कि भुगतान करने की व्यवस्था कैश की उपलब्धता पर निर्भर करती है। 
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