वायरल रिकॉर्डिंग में बागपत से सपा प्रत्याशी कुलदीप उज्ज्वल की डीएम पर जातिगत टिप्पणी पर ब्राह्मण और त्यागी समाज ने नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि सपा ने उज्ज्वल पर कार्रवाई नहीं की तो समाज पार्टी का बहिष्कार करेगा।
मंगलवार को वात्सायन पैलेस में जुटे समाज के लोगों ने कहा कि प्रशासन से राज्य मद्य निषेध परिषद के चेयरमैन का जो भी झगड़ा रहा हो, लेकिन किसी बिरादरी पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी।
योगेश प्रधान ने कहा कि समाज को ऐसे अपशब्द बोलना गलत है। प्रांतीय महामंत्री राधेश्याम शर्मा ने कहा कि उज्ज्वल पर कार्रवाई नहीं हुई तो सपा का बहिष्कार किया जाएगा।
त्यागी समाज के संरक्षक सदस्य सुभाष त्यागी एडवोकेट ने कहा कि समाज को एकजुट कर इसका जवाब दिया जाएगा। साथ ही निंदा प्रस्ताव पास किया गया। तय किया गया कि बुधवार को 11 बजे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम ज्ञापन डीएम को सौंपा जाएगा।
ब्राह्मण सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजपाल शर्मा ने बताया कि अध्यक्ष बीडी शर्मा भी आंदोलन में शामिल होंगे। 12 जून को बैठक होगी। रालोद नेता और ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष सुरेश कौशिक ने कहा कि अपमान का बदला लिया जाएगा।
इस बैठक की अध्यक्षता पंडित विजयपाल शर्मा और संचालन महामंत्री ऋषि कौशिक ने किया। इसमें अनिलदेव त्यागी, देवेंद्र प्रधान, आशीष प्रधान, ओमदत्त शर्मा, बबलू शर्मा, राजपाल शर्मा, जयभगवान शर्मा, प्रवीण प्रधान, वेदप्रकाश, अनिल वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।
दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री के खिलाफ ब्राह्मणों में गुस्सा
खेकड़ा । मंगलवार को अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा की खेकड़ा शाखा के सदस्यों की स्थानीय कार्यालय में बैठक हुई। इसमें उमेश शर्मा ने कहा समाचार पत्रों में मंत्री द्वारा ब्राह्मण समाज के प्रति जो वक्तव्य प्रकाशित हुआ है उससे यह प्रतीत होता है कि सपा ब्राह्मण जाति से नफरत करती है।
उन्होंने कहा दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री कुलदीप उज्ज्वल को अपने वक्तव्य के लिए माफी मांगनी चाहिए अन्यथा विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण समाज सपा का विरोध करेगा। बैठक में सुखबीर शर्मा, डॉ. सुरेश चंद कौशिक, चंद्रबल शर्मा, फेरू सिंह, अतर सिंह ठेकेदार, अनुराग कौशिक, महावीर सिंह, वेदप्रकाश कौशिक, सूरजपाल, कालूराम आदि रहे।
कानून को क्यों भूल गए अफसर?
बागपत। आम आदमी को बात-बात पर कानून का पाठ पढ़ाने वाले अफसर राज्य मद्य निषेध परिषद के चेयरमैन डॉ. कुलदीप उज्ज्वल की रिकॉर्डिंग पर चुप्पी साध गए हैं।
जानकारों का कहना है कि उन पर रौब गालिब करने, डराने-धमकाने, गालियां देने, देख लेने की धमकी देने और जबरन सरकारी कार्य के लिए दबाव बनाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज हो सकता था। वायरल रिकॉर्डिंग की जांच नहीं कराना भी अफसरों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। मंगलवार को दिनभर इस बारे में गुपचुप पूछताछ चलती रही।